कभी आबाद और खुशहाल था यह किला
दिल्ली से 300 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर में मौजूद यह किला आज वीरान है। लेकिन कभी यह खंडहर एक भव्य और आबाद इलाका हुआ करता था।
विज्ञापन
2 of 7
Bhangarh
भूतिया किले के पास हैं दर्जनों मंदिर
इलाके में दाखिल होते ही सोमेश्वर, हनुमान, कृष्ण केशव, मंगला देवी समेत दर्जनों मंदिर हैं। इन्हें देख आप सोच में पड़ जाएंगे कि भगवान के होते हुए भी यहां भूत कैसे हो सकते हैं।
विज्ञापन
3 of 7
Bhangarh
नहीं है किसी भी इमारत की छत
किले के अंदर किसी भी इमारत की छत नहीं है। लेकिन ताज्जुब ये कि सभी मंदिर सही सलामत हैं।
4 of 7
Bhangarh
शापित है यह किला
कहा जाता है कि जिस जगह महल बना उसके पास गुरू बालू नाथ रहते थे। उन्होंने महल निर्माण के दौरान चेतावनी दी थी कि महल की परछाईं उनके ध्यान करने वाली जगह पर नहीं पड़े वरना पूरा नगर तबाह हो जाएगा। लेकिन किसी ने इस बात पर गौर नहीं किया। इसी श्राप के कारण पूरा किला रातों-रात वीरान हो गया।
विज्ञापन
5 of 7
Bhangarh
तांत्रिक ने भी दिया था श्राप
किंवदंती है कि शींडा नाम के तांत्रिक ने मरने से पहले किले की बर्बादी का श्राप दिया था। मिथकों के अनुसार तांत्रिक शींडा भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती को पसंद करता था। राजकुमारी को वश में करने के लिए उनके इत्र पर जादू-टोना कर दिया। लेकिन रत्नावती को यह बात पता चल गई और उसने तेल को पत्थर पर फेंक दिया। इसी पत्थर से कुचलकर तांत्रिक की मौत हो गई। घटना के बाद भानगढ़ पर अजबगढ़ ने आक्रमण किया। युद्ध के दौरान किले में रह रहा हर एक शख्स मार डाला गया।
विज्ञापन
6 of 7
Bhangarh
श्राप के कारण अभी भी भटकती हैं आत्माएं
तांत्रिक ने श्राप दिया था कि यहां रहने वाला कोई भी इंसान दोबारा जन्म नहीं ले पाएगा। माना जाता है कि अकाल मृत्यु के कारण ही आज भी यहां आत्माएं भटकती हैं।
रात में कोई नहीं रुकता यहां
शाम ढलते ही यहां से लोग लौट जाते हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से भी सख्त चेतावनी दी गई है कि रात में किले के अंदर किसी का भी प्रवेश वर्जित है। आसपास के इलाके में रहने वाले लोग बताते हैं कि यहां रातभर रहने वाला शख्स कभी लौट के नहीं आया। जो लौटा वो चैन से जी नहीं पाया।