फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मान्यता: जो श्रद्धालु इस मजार पर चढ़ाते हैं घड़ी, चंद दिनों में पूरी होती हैं ख्वाहिश बड़ी से बड़ी

Tue, 17 Jul 2018 07:44 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
नौ गजा बाबा की मजार
भारत में आपको ऐसे अनेकों जाने-माने मंदिर, दरगाह, मजार हैं जहां लोग अपनी-अपनी मन्नतें पूरी होने पर अपने कहे अनुसार चढ़ावा चढ़ाते हैं। ऐसी ही एक मजार है जहां मन्नत पूरी होने पर लोग घड़ियां चढ़ाते हैं। इसके पीछे छुपा कारण जब आप जान लेंगे तो यकीनन आपको भी बड़ा ताज्जुब होगा। वैसे ये कहावत है कि इस मजार पर चढ़ावे के रूप में घड़ी चढ़ाने पर मुंह मांगी मन्नत पूरी हो जाती है।  
विज्ञापन

2 of 6
नौ गजा बाबा की मजार
इसलिए हर रोज हजारों लोग इस मजार पर अपनी-अपनी मुरादें लेकर आते हैं। आपको बता दें ये बाबा सैयद इब्राहिम की नौ गज की मजार है। जो 34 इंच लंबी और 15 इंच चौड़ी है। पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर शाहबाद के नजदीक बनी इस मजार पर हाइवे से गुजरने वाला हर व्यक्ति यहां जरुर रुक कर जाता है।
 
विज्ञापन

3 of 6
नौ गजा बाबा की मजार
यहां मन्नतें मांगने वाले लोग चढ़ावे में घड़ी चढ़ा कर जाया करते हैं। दरअसल, यहां लोगों की मान्यता है कि लगभग 1500 साल पहले हरियाणा के शाहबाद जिले में नौगजा पीर बाबा रहते थे। इनके पास चमत्कारी शक्तियां हुआ करती थी जिनकी मदद से वे लोगों की भलाई का काम किया करते थे। इसी से उनकी पहचान एक संत के बतौर की जाने लगी। उनका कद 8 गज का था। कहते हैं कि वे इराक से भारत आए थे और शाहबाद मारकंडा के कल्याण गांव में आकर बस गए। 

4 of 6
नौ गजा बाबा की मजार
उनके चमत्कारों से हिन्दू और मुस्लिम दोनों वाकिफ थे। उनकी मौत के बाद नौदारा पुल के नीचे उनकी मजार बना दी गई, जिसे हरियाणा सरकार ने दार्शनिक स्थल घोषित कर दिया है। इस जगह को नौगजा पीर और नौदारा के नाम से जाना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नौदारा नाम नौ देवता के नाम पर पड़ा और इसके बिल्कुल सामने शिव मंदिर है। पीर के साथ-साथ लोग वहां पर भी दर्शन के लिए जाते हैं।

 
विज्ञापन

5 of 6
नौ गजा बाबा की मजार
मजार पर क्यों चढ़ाई जाती हैं घड़ियां  
मान्यता है कि बाबा समय के बहुत पाबंद थे। अपना हर एक काम वह समय पर ही किया करते थे। बाकी लोगों का मानना है कि हाईवे पर वाहन चालकों को समय पर और सुरक्षित पहुचने की चिंता होती है। ऐसे में यहां घड़ी चढ़ाने वालों में ज्यादातर लोग ड्राइवर होते हैं। उनके साथ कोई हादसा न हो इसके लिए वे मजार पर घड़ी चढ़ावे के रूप में चढ़ाते हैं। साथ ही वे समय पर अपनी मंजिल में पहुंचने की दुआ मांगते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
नौ गजा बाबा की मजार
कई बार यहां चढ़ावे में इतनी अधिक घड़िया चढ़ती हैं कि उन्हें बेचना पड़ जाता है। फिर उस पैसे से ही मजार की देखभाल की जाती है और वहां के सेवकों को वेतन दिया जाता है। गुरुवार और रविवार के दिन मजार पर मेला भी लगता है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें