गुब्बारा बम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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फू-गो गुब्बारा बम
अमेरिका और जापान दोनों ही लंबे वक्त से प्रशांत महासागर पर नियंत्रण चाहते थे। उनकी ये महत्वाकांक्षा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी रही। ऐसे में जापान की इंपीरियल आर्मी के नेतृत्व कर रहे जनरल दुश्मन पर हमला करने के नए तरीकों के बारे में विचार कर रहे थे। कॉएन कहते हैं, "जापान को प्रशांत महासागर में चलने वाले वायु प्रवाह की और अमेरिका के पश्चिमी तट और इस इलाके की भौगोलिक स्थिति के बारे में अच्छी जानकारी थी।"
अमेरिकी सेना के दस्तावेजों के अनुसार जापान का उद्देश्य था अमेरिका के पश्चिमी तट पर मौजूद जंगलों में आग लगाना ताकि इसे यहां की जनता के बीच डर फैल जाए। वो कहते हैं, उन्हें इस बात का यकीन था कि गुब्बारों के जरिए बारूद डालने का उनका तरीका काम करेगा। अमेरिकी नौसेना के पुराने दस्तावेजों के अनुसार ये बलून 10 मीटर चौड़े, 20 मीटर ऊंचे थे और इनमें हाइड्रोजन गैस भरी हुई थी। कॉएन कहते हैं, "ये गुब्बारे छोड़ते वक्त जापान ने प्रशांत महासागर के वायु प्रवाह का लाभ उठाया था। उन्हें पता था कि हवा इन्हें सीधे अमेरिका तक बहा ले जाएगी।"