पुराने पुल की जगह नए पुल बनाने की परम्परा सालों से पीढ़ दर पीढ़ी चली आ रही है, जिसमें दोनों तरफ़ के युवा इकट्ठा होकर घास से रस्सियां बनाते हैं और पुल की एक तरह से बुनाई करते हैं।परम्परा के अनुसार, पुल को बनाने में सिर्फ़ मर्द ही हिस्सा लेते हैं। महिलाएं नदी के दोनों ओर ऊंची जगहों पर बैठक कर छोटी छोटी रस्सियां बुनती हैं। काम के पहले दिन, सभी मर्द पुराने पुल के पास इकट्ठा होते हैं और छोटी छोटी रस्सियों से बड़ी रस्सियां बनाते हैं। मुख्य पुल छह बड़ी रस्सियों से बनता है। इन रस्सियों की मोटाई एक फ़ुट तक होती है, जिन्हें पतली पतली 120 रस्सियों से मिलाकर बनाया जाता है।