27 साल की लौरा टेक्सीरिया हर महीने माहवारी के दौरान निकलने वाले खून को इकट्ठा करके वह अपने चेहरे पर लगाती हैं। इसके बाद बचे हुए खून को पानी में मिलाकर अपने पेड़ों में डालती हैं। 'सीडिंग द मून' नाम की ये प्रथा कई पुरानी मान्यताओं से प्रेरित है, जिनमें माहवारी के खून को उर्वरता के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। इस प्रथा को मानने वाली महिलाएं अपने पीरियड को अपने ही अंदाज में जीती हैं। लौरा बीबीसी को बताती हैं, "जब मैं अपने पेड़ों में पानी डालती हूं तो मैं एक मंत्र का जाप करती हूं, जिसका मतलब है- मुझे माफ करना, मैं आपसे प्यार करती हूं और आपकी आभारी हूं।" लौरा कहती हैं कि जब वह अपने खून को अपने चेहरे और शरीर पर लगाती हैं तो वह सिर्फ आंखें बंद करती हैं और शुक्रगुजार महसूस करती हैं, और अपने अंदर शक्ति का संचार होते हुए महसूस करती हैं।