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Frozen Water on Moon: चांद के अंधेरे इलाके का खुल गया रहस्य, वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

Wed, 04 May 2022 05:43 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : Pixabay
Frozen Water on Moon: साल 2009 में एक रॉकेट चांद की सतह से नौ हजार किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से टकराया था जिसका वजन दो टन है। इस टक्कर के बाद इतनी भीषण आग निकली की चांद की सतह सैकड़ों डिग्री सेल्सियस गर्म हो गई। काले गहरे क्रेटर (गड्ढे) से सफेद रोशनी निकलती नजर आई। इस क्रेटर का नाम कैबियस है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने लूनर क्रेटर ऑब्जरवेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट (LCROSS) की जानबूझकर चांद की सतह से टक्कर कराई थी। नासा यह जानना चाहता था कि चांद पर अंधेरे वाले इलाके में रॉकेट के टकराने से क्या होता है? या कैसी धूल या धुआं बाहर निकलता है? 

इस रॉकेट के पीछे नासा ने अपना एक दूसरा अंतरिक्षयान भेजा था जिससे टक्कर के दौरान की तस्वीरें ली जा सकें। इसके साथ ही नासा का लूनर  रीकॉनसेंस ऑर्बिटर दूर से ही परी घटना का निरीक्षण कर रहा था। दोनों अंतरिक्षयानों की तस्वीरों को देखने के बाद वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए। वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर रॉकेट की टक्कर से उठने वाली धूल में 155 किलोग्राम पानी का भाप देखा। उस दौरान पहली बार चांद की सतह पर पानी मिला था। 
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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : Twitter @UUx4whxHO5injW3
नासा के अमेस रिसर्च सेंटर में लूनर क्रेटर ऑब्जरवेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर एंथनी कोलाप्रेट ने इस नजारे को हैरतअंगेज बताया था। उन्होंने कहा कि तस्वीरों की जितनी बार जांच की गई उतनी बार नतीजा वही था। एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्लैनेटरी साइंटिस्ट मार्क रॉबिन्सन का कहना है कि चांद पर पानी का कोई स्रोत नहीं है और ना कोई खान है यह सच्चाई है। 
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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : Pixabay
उनका कहना है कि चांद पर वायुमंडल नहीं है। वहां पर बेहद एक्सट्रीम पर्यावरण की वजह से कही से पानी बनने और रुकने की कोई संभावना नहीं रहती है। एक अंतरिक्षयान ने 25 साल पहले जब चांद के ध्रुवों पर हाइड्रोजन की खोज की थी तब भी वहां पर बर्फ जमी होने की संभावना जताई गई थी। इस थ्योरी को LCROSS की तरफ से प्रमाणित भी किया गया। 

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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : Pixabay
जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर सिस्टम रिसर्च के साइंटिस्ट वैलेंटीन बिकेल ने एक चौकाने वाली बात बताई है। उनका कहना है काफी जांच के बाद यह जानकारी मिली है कि चांद पर छह लाख किलोग्राम पानी मौजूद है। इनमें से चांद के जिन दोनों ध्रुवों के ज्यादातर इलाके हैं वहां पर हमेशा अंधेरा रहता है। इनको पर्मानेंटली शैडोड रीजन्स (PSRs) कहा जाता है। इन इलाको में कैबियस की तरह क्रेटर्स मौजूद हैं। यहां हमेशा अंधेरा रहता है, क्योंकि कभी सूरज की रोशन नहीं पहुंचती है। 
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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : iStock

एक दूसरे वैज्ञानिक का कहना है कि कुछ पर्मानेंटली शैडोड रीजन्स प्लूटो से भी ठंडे हैं जिसका मतलब है कि वहां पर जरूर बर्फ होगी और इनके पिघलने की उम्मीद बेहद कम है। उन्होंने संभावना जताई है कि इनके अंदर पड़ी बर्फ करोड़ों साल से वैसी की वैसी ही हो। उनका कहना है कि यहां धरती पर पानी के बनने और उत्पत्ति का कोई संबंध हो। यह लंबे अंतरिक्ष मिशन के दौरान इंसानों के काम आ सके। 
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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : Pixabay
पर्मानेंटली शैडोड रीजन्स की जांच के लिए नासा साल 2023 में रोबोट भेजने की तैयारी कर रहा है जो इन क्रेटर्स में जांकर जांच पड़ताल करेंगे। नासा जानना चाहता है कि क्या वहां इतनी बर्फ है। इसके अलावा इस दशक के आखिरी तक चांद पर इंसानों को भेजने की तैयारी में नासा लगा हुआ है। 
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चांद के अंधेरे इलाके का खुला हस्य - फोटो : Pixabay

चांद पर अंधेरे वाला इलाका एक रहस्य है, क्योंकि यहां पर क्या है इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। वैज्ञानिक इसके बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं।
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