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New Research: कछुआ और ये जीव भी बोलकर करते हैं बातचीत, रिसर्च में हुआ हैरान करने वाला खुलासा

Wed, 26 Oct 2022 02:27 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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कछुआ और ये जीव भी बोल कर करते हैं बातचीत - फोटो : iStock
New Research: एक शोध में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। अभी तक जिन जीवों को मूक माना जाता था उनकी आवाज और बातचीत को रिकॉर्ड किया गया है। इस शोध को नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में मंगलवार को प्रकाशित किया गया जिसमें बताया गया है कि कछुए और मछलियों जैसे कुछ जीव आपस में बोलकर बातचीत करते हैं।  

इस शोध के मुताबिक, पहले माना जाता था कि 50 से अधिक जीवों की प्रजातियां नहीं बोलती हैं, लेकिन वास्तव में वह संवाद करती थीं। इस शोध में बताया गया है कि 407 मिलियन वर्ष (40.07 करोड़ साल) पहले इनके पूर्वज संचार करने में सक्षम थे। इन जीवों में इनके पूर्वज से संवाद करने की क्षमता का विकास हुआ है। इस शोध के प्रमुख लेखक, जीवविज्ञानी गेब्रियल जोर्गेविच-कोहेन ने बताया कि पहली बार उन्हें अमेजन रेनफॉरेस्ट में कछुओं पर शोध करते समय मूक प्रजातियों की आवाज को रिकॉर्ड करने का विचार आया।
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कछुआ और ये जीव भी बोल कर करते हैं बातचीत - फोटो : iStock
कोहेन जब अपने घर वापस आए, तो उन्होंने अपने पालतू जानवरों की आवाज की रिकॉर्डिंग करने का निर्णय लिया। इसमें होमर नाम का एक पालतू कछुआ भी शामिल था जो उनके पास बचपन से है। उन्होंने पाया कि होमर और उनके पालतू कछुए आवाज निकाल रहे थे। इसलिए उन्होंने कछुओं की अन्य प्रजातियों की आवाज की रिकॉर्ड करनी शुरू कर दी। आवाज को रिकॉर्ड करने के लिए उन्होंने कभी-कभी हाइड्रोफोन, पानी के भीतर रिकॉर्डिंग के लिए माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया।
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कछुआ और ये जीव भी बोल कर करते हैं बातचीत - फोटो : iStock
इन अजीब जानवरों में एक प्रकार की लंगफिश शामिल है जिसमें गलफड़े के साथ-साथ फेफड़े भी होते हैं। इसकी वजह से यह पीना के बिना जमीन पर भी जीवित रह सकती है। इसके अलावा सीसिलियन की एक प्रजाति को भी शामिल किया गया है जो एक सांप की तरह दिखता है। 

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कछुआ और ये जीव भी बोल कर करते हैं बातचीत - फोटो : iStock

इस शोध में शामिल वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ सरीसृप की आवाज को भी रिकॉर्ड किया जो सिर्फ न्यूजीलैंड में पाया जाता है। इसे टुआटेरा कहा जाता है जो राइनोसेफेलिया का एकमात्र जीवित सदस्य है। पहले यह पूरी दुनिया में पाए जाते थे। जानवर किट-किट, चिर या शोर करने वाली आवाजें निकालते हैं। भले ही वह धीरे से या दिन में कुछ ही बार आवाज निकालते हों।

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कछुआ और ये जीव भी बोल कर करते हैं बातचीत - फोटो : iStock
गेब्रियल जोर्गेविच कोहेन के मुताबिक, शोधकर्ताओं की टीम ने अपने शोध को 1800 अन्य जीवों की प्रजातियों के अकूस्टिक कम्युनिकेशन के उत्पत्ति के इतिहास के आंकड़ों के साथ जोड़ा। इसके बाद उन्होंने पैतृक अवस्था पुनर्रचना नाम के विश्लेषण का इस्तेमाल किया और जाना कि पुराने समय के जीवों से क्या संबंध है? इस शोध से पता चलता है कि न सिर्फ कशेरुक, बल्कि मूक मानी जाने वाली कई प्रजातियों में ध्वनि निकालने के सबूत हैं। उदाहरण के लिए, कई कछुए जिन्हें पहले मूक माना जाता था, वास्तव में वह व्यापक तौर ध्वनि करते हैं। 

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कछुआ और ये जीव भी बोल कर करते हैं बातचीत - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं ने छिपकलियों, सांपों, सैलामैंडर, उभयचर, और लंगफिश जैसी प्रजातियों की ध्वनि क्षमता पर प्रासंगिक जानकारी को फिलोजेनेटिक विशेषता पुनर्निर्माण तकनीकों के साथ जोड़ा ताकि कशेरुकियों में ध्वनि संचार के विकास के इतिहास का पता लगाया जा सके। इस अध्ययन में कहा गया है कि इनके पूर्वज कम से कम 407 मिलियन वर्ष (40.07) पहले पुरापाषाण काल के दौरान रहते थे। 
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