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एक ऐसा देश, जहां जिंदगी का असली मजा कब्रिस्तान में है, एक बार जरूर घूमकर आएं

Sun, 15 Apr 2018 05:00 PM IST
मनाेरंजन डेस्क, अमर उजाला
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फाइल फोटो
कब्रिस्तान का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, लेकिन डेनमार्क में इसका नाम सुनते ही लोगों के चेहरे खिल जाते हैं। डेनमार्क जाएं, तो यहां के खूबसूरत कब्रिस्तान में समय जरूर बिताएं।
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फाइल फोटो
दुनिया भर में घूमने-फिरने के लिए कई खूबसूरत जगहें हैं, जहां परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताया जा सकता है। लेकिन सोचिए, आपका दोस्त या परिवार का कोई सदस्य घुमाने के नाम पर आपको कब्रिस्तान की सैर कराए, तो क्या करेंगे आप? संभव है, डर के भाग जाएं, लेकिन एक ऐसा देश है, जहां कब्रिस्तान में दोस्तों के साथ मौज करना और परिवार के साथ समय बिताना पसंद किया जाता है।
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फाइल फोटो
उस देश का नाम है डेनमार्क। यह ऐसा देश है, जो बहुत खूबसूरत है। यहां घूमने के लिए बहुत सी अच्छी जगहें हैं, फिर भी यहां के लोगों को कब्रिस्तान में घूमकर सुकून मिलता है। 
यह स्थान डेनमार्क के लोगों के लिए खास है। इसकी वजह कब्रिस्तान में उनके अपनों की समाधि होना है। डेनमार्क के लोगों को जब भी समय मिलता है, वह अपनों से मिलने और उनका ध्यान रखने के लिए कब्रिस्तान चले जाते हैं। उनके हिसाब से यह सामाजिक बनने का भी सबसे अच्छा तरीका है।

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cemeteries
दूर हो चुके करीबियों से जुड़े रहने का अहसास उन्हें होता है। वहां के आम पार्कों में जितनी सुविधाएं रहती हैं, उतनी सुविधाएं इन कब्रिस्तानों में भी होती हैं। पेड़ पौधों से लैस, चारों तरफ शांत वातावरण होता है। कब्रिस्तान को सुंदर फूलों से सजाया जाता है। कई लोग अपने पूर्वजों या करीबियों की कब्र के पास उनकी पसंद के अनुसार, पेड़-पौधे लगाते हैं। वहां के लोग जब भी क्रबिस्तान आते हैं, तो मृतक की पसंद के अनुसार ही खाना भी लाते हैं।
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इतना ही नहीं, वहां के लोगों के करीबी जो दुनिया से विदा हो चुके हैं, उनके लिए एक व्यक्तिगत पेड़ होता है, जिसमें उनकी तस्वीर या कुछ खास निशानियों को रखा जाता है। हर कोई कब्रिस्तान में वक्त बिताने के लिए अपना एक अलग समय चुनता है और अपने दोस्तों या परिवार के साथ कब्रिस्तान की सैर करता है। कब्रिस्तान से क्या उन्हें डर नहीं लगता? इस पर वे कहते हैं कि यहां हमारे अपने लोग ही हैं, फिर उनसे क्यों डरना? वे कहते हैं कि उनके पूर्वजों की आत्मा किसी न किसी रूप में उनके साथ होती है। वह उन्हें अकेला नहीं छोड़ते, तो वह कैसे अपनों को अकेला छोड़ दें? यह उनका ही कर्तव्य है कि उनके पूर्वजों के जाने के बाद भी वह उनका ख्याल रखें और उनके साथ खड़े रहें। 
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