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True Story: तूफानी रात, बारूदी सुरंगें और 10 साल की मेहनत, जानें नॉर्थ कोरिया से भागने की खौफनाक कहानी

Wed, 22 Apr 2026 02:52 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Kim Brothers Defection Story: एक ऐसा देश जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां से एक परिवार का भाग निकलना मौत के मुंह से बाहर आने से कम नहीं है। आइए जानते हैं नॉर्थ कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया पहुंचने वाले एक जांबाज परिवार की कहानी।
 
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मौत के रास्ते पर चलकर पाई आजादी - फोटो : AI
North Korea Escape Story: जहां सांस लेना भी निगरानी में हो, वहां आजादी सिर्फ एक ख्वाब बनकर रह जाती है। उत्तर कोरिया ऐसा ही एक देश है, जहां से बाहर निकलना मानो मौत को दावत देना हो। लेकिन इसी डर के साये में दो भाइयों, किम इल-ह्योक और किम यी-ह्योक ने वो कर दिखाया, जिसे सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाएं।

करीब एक दशक पहले उनके पिता ने आजादी का सपना देखा था। उसी अधूरे सपने को पूरा करने के लिए भाइयों ने अपनी जान दांव पर लगा दी। उन्होंने 6 मई 2023 का दिन चुना, एक ऐसी रात, जब समंदर में उठा तूफान पहरेदारों की आंखों पर पर्दा डाल सकता था। यही मौका था, जब उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का फैसला किया।
 
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कितना गहरा और खतरनाक है समुद्र? - फोटो : Adobe Stock
बेहतर भविष्य के लिए उठाया जोखिम 
यह सफर सिर्फ खतरनाक नहीं, बल्कि दिल दहला देने वाला था। बच्चों की हल्की सी आवाज भी खतरा बन सकती थी, इसलिए 4 और 6 साल के मासूमों को बोरियों में छुपाना पड़ा। परिवार की महिलाओं को उस रास्ते से गुजरना पड़ा, जहां जमीन के नीचे बारूदी सुरंगें बिछी थीं। एक छोटी सी चूक सब कुछ खत्म कर सकती थी। किम की पत्नी, जो उस वक्त पांच महीने की गर्भवती थीं, पहले हिचकिचाईं, लेकिन आने वाले बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने भी इस जोखिम भरे सफर में कदम बढ़ा दिया।
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रियल लाइफ नर्क दानाकिल डिप्रेशन इथोपिया के अफार इलाके में स्थित है. यह भूगर्भीय दृष्टि से बेहद सक्रि - फोटो : AI
वर्षों से चल रही थी तैयारी
इस प्लान की सबसे खास बात थी इसकी तैयारी। वर्षों तक दोनों भाई मछुआरे बनकर कोस्टल गार्ड्स का भरोसा जीतते रहे। वे बार-बार सीमा के पास जाते और लौट आते, ताकि उनकी मौजूदगी सामान्य लगने लगे। आखिरकार, उस तूफानी रात उन्होंने पहरेदारों को रिश्वत दी और अंधेरे का फायदा उठाकर नाव का रुख दक्षिण कोरिया की ओर मोड़ दिया। उनके साथ उनके पिता की अस्थियां भी थीं, क्योंकि वे उन्हें उस ‘कैद’ में छोड़ना नहीं चाहते थे।

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आखिरकार मिली आजादी की किरण - फोटो : adobestock
आखिरकार मिली आजादी की किरण
जैसे ही उनकी नाव दक्षिण कोरिया की सीमा में पहुंची, दूर से चमकती रोशनी ने उनका स्वागत किया। जब नेवी ने पूछा, “क्या इंजन खराब है?” तो उनका जवाब था, “नहीं, हम आज़ादी की तलाश में आए हैं।”
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आखिरकार मिली आजादी की किरण - फोटो : adobestock
लेकिन इस कहानी का अंत पूरी तरह खुशहाल नहीं रहा। जिस भाई ने इस आज़ादी की योजना को वर्षों तक जिया, वह इसे ज्यादा समय तक महसूस नहीं कर पाया। आज़ादी मिलने के सिर्फ 19 महीने बाद एक डाइविंग हादसे में छोटे भाई की मौत हो गई, एक ऐसा मोड़, जिसने इस जीत को भी अधूरा सा बना दिया।


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