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NASA Artemis II: अंतरिक्ष में करोड़ों का टॉयलेट खराब, स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स कैसे जाते हैं टॉयलेट

Thu, 09 Apr 2026 03:00 PM IST
Dharmendra Kumar Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

NASA Artemis II: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आर्टेमिस II मिशन को 1 अप्रैल 2026 को भेजा था। अब अंतरिक्ष यात्री चांद का चक्कर लगाने के बाद धरती पर वापस आ रहे हैं, लेकिन ओरियन स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट में खराबी आ गई है। 
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स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स कैसे जाते हैं टॉयलेट? - फोटो : NASA
NASA Artemis II: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आर्टेमिस II मिशन को 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया था। इस मिशन के दौरान चार अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों तरफ की यात्रा की। इसके बाद ओरियन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की तरफ वापस आ रहा है। अभी तक सबकुछ ठीक था, लेकिन अब स्पेसक्राफ्ट में लगभग 192 करोड़ का बने टॉयलेट में अचानक खराबी आ गई है। अंतरिक्ष में यूरिन को फेकने वाला सिस्टम बंद हो गया है। नासा का कहना है कि एक केमिकल रिएक्शन के कारण यूरिन सिस्टम में खराबी आई है। पॉटी निकालने वाला अलग सिस्टम है, जो ठीक चल रहा है। 

अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने बताया कि यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम से जले हुए हीटर की तरह दुर्गंध आ रही है। फ्लाइट डायरेक्टर रिक हेनफ्लिंग ने कहा कि अब भी टॉयलेट काम कर रहा है। लेकिन वेस्टवॉटर टैंक को खाली करने में समस्या है। मतलब निकासी कम हो गई है, जिसकी वजह से अंतरिक्ष यात्री बैकअप का इस्तेमाल कर रहे हैं। अभी सभी अंतरिक्ष यात्री व्यक्तिगत दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले कंटेनर का इस्तेमाल कर रहे हैं। 
 
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स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स कैसे जाते हैं टॉयलेट? - फोटो : NASA
यह समस्या लिफ्टऑफ यानी आर्टेमिस II मिशन के लाॅन्च होने के कुछ ही घंटों बाद शुरू हो गई थी। क्रिस्टीना कोच ने सिस्टम के कंट्रोल्स को ठीक किया। मिशन कंट्रोल की मदद से फिर से चालू किया गया। अंतरिक्ष यात्रियों को लगा समस्या ठीक हो गई है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। कोच ने बताया कि टॉयलेट अंतरिक्ष यान का सबसे जरूरी उपकरण है। आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष में टॉयलेट की क्या व्यवस्था है, कैसे जाते हैं टॉयलेट और अंतरिक्ष यात्रियों का मल-मूत्र कहां जाता है? 

 
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स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स कैसे जाते हैं टॉयलेट? - फोटो : NASA
अंतरिक्ष में कैसे जाते हैं टॉयलेट? 

स्पेस में अंतरिक्ष यात्रियों के टॉयलेट जाने के लिए विशेष व्यवस्था होती है। अंतरिक्ष स्टेशन में एक विशेष टॉयलेट बनाया जाता है। देखने में सामान्य टॉयलेट की तरह ही लगता है, लेकिन यह अलग होता है। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी की वजह से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए टॉयलेट जाना मुश्किल होता है। मल-मूत्र हवा में तैर सकते हैं, जिसकी वजह से विशेष व्यवस्था की जाती है। अंतरिक्ष में टॉयलेट के लिए उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। 

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चांद का चक्कर लगाने वाले अंतरिक्ष यात्री - फोटो : NASA
स्पेस में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए हाइटेक वैक्यूम टॉयलेट होते हैं। यह अंतरिक्ष यात्रियों के मल और मूत्र को खींचकर अलग-अलग टैंक में जमा कर देते हैं। इस खासियत होती है कि अंतरिक्ष यात्री बैठकर या खड़े होकर इस टॉयलेट का आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर कागज की मदद सफाई करते हैं। हालांकि, छोटे मिशन में अभी भी पोर्टबल बैग का इस्तेमाल होता है। 

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स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स कैसे जाते हैं टॉयलेट? - फोटो : AI
स्पेस स्टेशन में कैसे करते हैं यूरिन? 

अंतरिक्ष स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पेशाब करने के लिए भी विशेष व्यवस्था होती है। इसके लिए वो एक वैक्यूम वाले पाइप का इस्तेमाल करते हैं। यह वैक्यूम पाइप यूरिन को खींचकर अलग टैंक में जमा कर देता है। यह टॉयलेट वाले टैंक से अलग होता है। इस टैंक में जमा यूरिन रिसाइकल करके फिर से पीने के काम में इस्तेमाल होता है। 
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