नखचिवन
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सेहतमंद खाना
यहां भोजन को बहुत सम्मान दिया जाता है। ईरान सीमा के पास लंच करते हुए इब्राहिमोव के दोस्त एलशाद हसानोव कहते हैं, "हम इस तरह खाते हैं क्योंकि हम यह कर सकते हैं।" खाने की कमी की यादें उनके जहन में ताजा हैं लेकिन आर्थिक निर्भरता की सोवियत नीति को छोड़ने के बाद नखचिवन ने अपनी नीति बनाई। इसमें कीटनाशकों के प्रयोग पर रोक लगाई गई, ऑर्गेनिक खाने को अपनाया गया।
सेहत को लेकर जागरूकता ने सुनिश्चित किया कि लोग बलबस नस्ल की जिन भेड़ों को खाएं वे नखचिवन के खेतों से आएं। वे मछलियां भी स्थानीय झीलों की खाते हैं। वे नखचिवन के पहाड़ों की तलहटी से जंगली सोआ, नागदौना और मीठी तुलसी लेते हैं। यहां तक कि नमक भी नखचिवन की भूमिगत गुफाओं से निकाला जाता है। खाने की मेज पर मेमने का गोश्त रखा गया। उसके साथ सब्जियों का सलाद, चीज, फ्लैट ब्रेड, कबाब, ताजी ट्राउट मछली, बीयर और वोदका परोसी गई।
वोदका में 300 तरह की जड़ी-बूटियां मिलाई गई थीं जिन्हें पास के पहाड़ों से लाया गया था। हर जड़ी-बूटी से किसी न किसी बीमारी का इलाज होता है। मैंने नखचिवन की ऑर्गेनिक और स्थानीय खाने के बारे में पूछा तो हसनोव ने खुशहाली का हवाला दिया। "हमारे लोग तंदुरुस्त हैं और हम पहले की तरह बीमारियों से ग्रसित नहीं हैं क्योंकि हम जो भी खाते हैं वह प्राकृतिक है।"