Mount Kailash Mystery: शिव पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण जैसे हिंदू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि भगवान शिव का कैलाश पर्वत निवास क्षेत्र है। यहां पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते हैं। कैलाश पर्वत जितना पूजनीय है, उतना रहस्यमयी भी है।
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पृथ्वी पर रहस्य, रोमांच और विज्ञान को चुनौती देता है महादेव का कैलाश पर्वत
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Mount Kailash Mystery: हिंदू धर्म में भगवान शंकर को सृष्टि का आदि और अंत कहा गया है। शिव दर्शन, कला और विज्ञान के रहस्यों को रचने वाले हैं। वे जितने रहस्यों से लिपटे हुए हैं, उतना ही रहस्यमयी हैं, पृथ्वी पर उनका स्थान कैलाश पर्वत है। पुराणों में कैलाश पर्वत को भगवान शिव शंकर का धाम माना गया है। यूं तो इंटरनेट की तस्वीरों और वीडियो में कैलाश की तस्वीरें आसान दिखाई देती हैं लेकििन शिव का यह लोक आधुनिक विज्ञान के लिए आज भी चुनौती बना हुआ है। यह पृथ्वी की उन दुर्लभ जगहों में से एक है, जहां पर इंसानों के पैरों की छांव तक नहीं पड़ी है।
हिमालय के सुदूर इलाकों में स्थित कैलाश पर्वत सिर्फ एक राजसी शिखर से कहीं अधिक है। यह एक रहस्य, आध्यात्मिकता और पहेली में डूबा हुआ स्थान है। यह तिब्बती पठार की बेहद सुंदरता के बीच स्थित करोड़ों लोगों के लिए पूजनीय और अद्भुत रहस्यों से भरा एक पर्वत है। इसकी समृद्ध किंवदंतियां और रहस्य इंसानों को आकर्षित करते हैं। भगवान शिव का निवास स्थान होने के कारण यह सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र है।
शिव पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण जैसे हिंदू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि भगवान शिव का कैलाश पर्वत निवास क्षेत्र है। यहां पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते हैं। कैलाश पर्वत जितना पूजनीय है, उतना रहस्यमयी भी है। कैलाश पर्वत पर आज तक कोई इंसान नहीं चढ़ पाया है। कैलाव पर्वत के रहस्यों को वैज्ञानिक भी नहीं जान पाएं। इस पर कई बार लोगों ने चढ़ने को कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। आज हम आपको कैलाश पर्वत के कुछ रहस्यों के बारे में बताएंगे।
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क्यों कोई नहीं चढ़ पाया?
माउंट एवरेस्ट से कैलाश पर्वत की ऊंचाई दो हजार मीटर कम है। माउंट एवरेस्ट की चोटी 8,849 मीटर ऊंची है, जिसे पर हजारों लोग चढ़ चुके हैं, लेकिन 6,638 मीटर ऊंची कैलाश पर्वत की चोटी पर कोई भी नहीं चढ़ पाया है। यह एक ऐसा रहस्य है, जिसका आज खुलासा नहीं हो पाया है। माना जाता है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत के स्वामी हैं। यहां पर भगवान भोलेनाथ माता पार्वती और अपने गणों के साथ निवास करते हैं। कैलाश पर्वत को लेकर कई शोध किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक रहस्य अनसुलझा है।
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पृथ्वी का केंद्र बिंदु
पृथ्वी के एक छोर पर उत्तरी और दूसरे छोर पर दक्षिणी ध्रुव स्थित है। इन दोनों ध्रुवों के बीच हिमालय स्थित है, जिसके केंद्र में कैलाश पर्वत स्थित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कैलाश पर्वत पृथ्वी का केंद्र बिंदु है। कैलाश पर्वत का हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म के लोगों के लिए भी विशेष महत्व है। कैलाश पर्वत के आसपास कोई बड़ा पर्वत नहीं है। शोध में वैज्ञानिक भी इस रहस्य को नहीं सुलझा पाए हैं कि ऐसा क्यों है।
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कैलाश पर्वत के चारों तरफ अलौकिक ऊर्जा
वैज्ञानिकों का मानना है कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक ऊर्जा है। इसके कारण कोई भी यहां पर पहुंच नहीं सकता है। कई बार वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की है, लेकिन यहां कोई भी आसानी से नहीं पहुंच पाया है। तिब्बत के कई सिद्धि हासिल करने वाले संत कहते हैं कि कैलाश पर्वत पर सिर्फ पुण्य आत्माएं ही निवास कर सकती हैं। कैलाश पर्वत के चारों के ओर अलौकिक शक्तियों का प्रवाह है। इसके कारण सिर्फ सिद्धि प्राप्त करके टैलीपैथी के माध्यम से ही वहां आसपास रहने वाले आध्यात्मिक गुरुओं से संपर्क किया जा सकता है।
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स्वास्तिक की आकृति वाले दो सरोवर
कैलाश पर्वत के पास दो रहस्यमयी सरोवर स्थित हैं। यह देखने में स्वास्तिक की तरह लगते हैं। पहले सरोवर का नाम मानसरोवर है, जिसका आकार सूर्य के समान है। मानसरोवर दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झील है। दूसरा सरोवर चंद्रमा की तरह है, जिसका नाम राक्षस झील है। यह खारे पानी की उच्चतम झील है। इन दोनों का सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से संबंध जोड़ा जाता है। इन सरोवरों के रहस्य को वैज्ञानिक आज तक सुलझा पाए हैं। वैज्ञानिक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि यह प्राकृतिक हैं या मानव निर्मित। सबसे बड़ी खासियत यह है कि दक्षिण दिशा की तरफ से देखने पर इन दोनों झीलों के मिलने से स्वास्तिक की आकृति बनती दिखाई देती है।
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ओम और डमरू की आती है आवाज
बताया जाता है कि कैलाश पर्वत या मानसरोवर झील के आसपास हमेशा डमरू बजने की आवाज आती है। इसके साथ ही ओम की आवाज भी गुंजती है। वैज्ञानिक आज तक इन आवाजों के बारे में कुछ नहीं बता पाए हैं। इन आवाजों को दूर से सुनने पर लगता है कि शायद कोई जहाज उड़ रहा है, लेकिन आंखे बंद करके ध्यानमुद्रा में इन आवाजों को सुनने पर, स्पष्ट तौर पर डमरू और ओम की आवाजें सुनाई देती हैं। वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि हो सकता है यह आवाजें बर्फ पिघलने की हो सकती हैं।
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कैलाश पर्वत पर दिखती है सात तरह की रोशनी
लोगों का कहना है कि कैलाश पर्वत पर सात तरह की रोशनी दिखाई पड़ती है। लोग बताते हैं कि रात में कैलाश पर्वत पर रंग-बिरंगी सात तरह की रोशनी दिखती है। इन रोशनियों का प्रकाश बहुत तेज होता है। इसमें एक-एक चीज बहुत साफ दिखाई देती है। वैज्ञानिक इस रहस्य का भी नहीं पता लगा पाए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर चुम्बकीय बल बहुत ज्यादा है, जिसके ऐसा हो सकता है।
पृथ्वी पर रहस्य, रोमांच और विज्ञान को चुनौती देता है महादेव का कैलाश पर्वत
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पर्वत के आसपास घूमते हैं हिम मानव
आपने कई बार हिम मानव की कहानियां सुनी होंगी, लेकिन आज तक किसी को नहीं पता है कि क्या सच में हिम मानव होते हैं। हिमालय के क्षेत्र में रहने वाले कई लोग दावा करते हैं कि उन्होंने कैलाश पर्वत के आसपास हिम मानव को घूमते हुए देखा है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का भी दावा है कि हिम मानव होते हैं, लेकिन उन्होंने हिम मानव की बनावट, इतिहास जैसे विषय में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं बताया है। लोगों के हिम मानव भी रहस्य हैं।
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चार नदियों का उद्गम स्थल
कैलाश पर्वत की चार दिशाओं से चार अहम नदियों का उद्गम हुआ है। कैलाश पर्वत से सिंध, ब्रह्मपुत्र, सतलज और करनाली (घाघरा) नदी निकली है। कैलाश के चारों तरफ अलग-अलग जानवरों के मुख हैं, जिनमें से नदियों का उद्गम होता है।
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वैज्ञानिकों का हैरान करने वाला खुलासा
कैलाश पर्वत को रूसे कै वैज्ञानिकों ने कई शोध किए। इनके मुताबिक, कैलाश पर्वत पर अलौकिक शक्तियां हैं। उनका कहना है कि यहां से अजीबोगरीब आवाजें आती हैं। रूसी वैज्ञानिकों का मानना है कि कैलाश पर्वत, आकाश और धरती के केंद्र में है। रूसी डॉक्टर एर्नस्ट मुल्दाशिफ और उनकी टीम ने कैलाश पर्वत के पास रहकर एक महीने शोध किया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कैलाश पर्वत पर काफी अधिक रेडियो एक्टिव किरणे हैं। पर्वतारोहियों के मुताबिक, इस पर्वत पर चढ़ना असंभव है, वहां पर उनके बाल और नाखून बहुत तेजी से बढ़ते हैं। इसके पास जाने पर सिर काम नहीं करता है। उनका कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है, जैसे कोई और उसे अपने कंट्रोल में कर रहा है।