Mysterious Temples: दुनिया में भारत को आध्यात्म और साधना का केंद्र माना जाता है। यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं जिनका विशेष महत्व है। इन मंदिरों में मां दुर्गा के कई बेहद चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं। देवी-देवताओं में आस्था रखने वाले लोग इसे भगवान की कृपा मानते हैं, तो वहीं अन्य लोगों के लिए यह आश्चर्य का विषय है। आज हम आपको नवरात्रि के मौके पर मां भगवती के कुछ रहस्यमयी मंदिरों के बारे में बताते हैं।
कामाख्या देवी मंदिर
यह चमत्कारिक मंदिर असम की राजधानी के निलाचल पहाड़ी पर मौजूद है। देवी के 51 शक्तिपीठों में शामिल यह मंदिर शक्ति-साधना का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर को तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है। कामाख्या देवी मंदिर में हर किसी की मनोकामना पूर्ण होती है। इस मंदिर को तीन भागों में बांटा गया है। इसके पहले हिस्से में हर किसी को जाने की इजाजत नहीं है जबकि दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं। यहां पर एक पत्थर से हमेशा पानी निकलता रहता है।
विज्ञापन
2 of 6
ये हैं मां दुर्गा के बेहद रहस्यमयी मंदिर
- फोटो : iStock
बताया जाता है कि इस पत्थर से महीने में एक बार खून की धारा बहती है। यह क्यों और कैसे होता है। इस बात का पता आज तक वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए हैं। हर साल मानसून के दौरान इस मंदिर को तीन के लिए बंद कर दिया जाता है। ऐसा देवी के मासिक धर्म के दौरान किया जाता है और बताया जाता है कि गर्भग्रह से बहने वाला झरना उन तीन दिनों में लाल हो जाता है।
विज्ञापन
3 of 6
ये हैं मां दुर्गा के बेहद रहस्यमयी मंदिर
- फोटो : iStock
ज्वाला देवी मंदिर
हिमाचल प्रदेश की कालीधार पहाड़ी के बीच माता ज्वाला देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। माता सती के जीभ के प्रतीक के तौर पर ज्वाला मुखी मंदिर में धरती से ज्वाला निकलती है। यह ज्वाला नौ रंग की होती है। यहां पर नौ रंगों की निकलने वाली ज्वालाओं को देवी शक्ति का नौ रूप माना जाता है। यह ज्वाला महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विन्ध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी की रूप है। मंदिर में निकलने वाली ज्वालाएं कहां से निकलती हैं और इनका रंग कैसे बदलता है। आज तक इस बात की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
4 of 6
ये हैं मां दुर्गा के बेहद रहस्यमयी मंदिर
- फोटो : iStock
मंदिर में जल रही ज्वाला को मुस्लिम शासकों ने कई बार बुझाने की कोशिश की, लेकिन उनको सफलता नहीं मिली। वैज्ञानिक भी यह पता नहीं लगा पाए हैं कि ज्वाला कहां से निकलती है। मंदिर में स्थित ज्वाला को मुगल शासनकाल में अकबर ने भी बुझाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इसके बाद देवी मां को स्वयं पचास किलो का छत्र चढ़ाया, लेकिन माता ने उस छत्र को स्वीकार नहीं किया और वह गिर गया। यह छत्र अभी भी मंदिर परिसर में रखा है।
विज्ञापन
5 of 6
ये हैं मां दुर्गा के बेहद रहस्यमयी मंदिर
- फोटो : Twitter @AgarbathiesVasu
मंगला गौरी मंदिर
गया शहर से कुछ दूरी पर स्थित भस्मकूट पर्वत पर शक्तिपीठ मां मंगलागौरी मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि मां सती का वक्ष स्थल (स्तन) गिरा था। यह शक्तिपीठ 'पालनहार पीठ' या 'पालनपीठ' नाम से प्रसिद्ध है। यह शक्तिपीठ असम के मां कमाख्या देवी शक्तिपीठ के समान माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, गया में सती का स्तन मंडल भस्मकूट पर्वत पर गिरे थे और दो पत्थर बन गए थे। प्रस्तरमयी स्तन मंडल में मां मंगलागौरी हमेशा निवास करती हैं। मान्यता है कि जो लोग शिला का स्पर्श करते हैं, वो अमरत्व को प्राप्त कर करते हैं और ब्रह्मलोक में निवास करते हैं। इस शक्तिपीठ की खास बात यह है कि मनुष्य जीवित रहते ही अपना श्राद्ध कर्म यहां संपादित कर सकता है।
ये हैं मां दुर्गा के बेहद रहस्यमयी मंदिर
- फोटो : Twitter @ArunudoyB
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर
भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर शामिल है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर मां दुर्गा के 51 शक्ति पीठों में शामिल है। इस मंदिर में मां काली के सोरोशी रुप की पूजा होती है। इस मंदिर का स्वरुप कछुआ के आकार का नजर आता है। इसलिए इसे कुर्मा पीठ कहा जाता है। यह मंदिर भी रहस्यमयी और चमत्कारिक है।