आमतौर पर घर पर रहने वाली महिलाओं को किसी तरह का वेतन नहीं मिलता है, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पहले ऐसा नहीं था। दरअसल, मुगल शासन में रानियों, शहजादियों और हरम में रहने वाली स्त्रियों को वेतन दिया जाता था। इस काम की शुरुआत भारत में मुगल सल्तनत की स्थापना के साथ बाबर ने की थी। शाही हरम में प्रवेश करने वाली हर स्त्री को उसकी स्थिति के अनुसार आजीविका भत्ता दिया जाता था, जिनमें औरंगजेब ने बहन जहांआरा बेगम का नाम सबसे ऊपर आता है। जहांआरा बेगम का सालाना वेतन इतना था ये जानकर आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी। सबसे अधिक वेतन होने के बाद भी औरंगजेब उसका वेतन बढ़ाता गया।
इस बात की जानकारी भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की शोध पत्रिका "इतिहास" के अंक में एक विस्तृत लेख में दी गई है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि किस तरह मुगल बादशाह महिलाओं के लिए वेतन की व्यवस्था करते थे। इसका भुगतान कैसे किया जाता था।