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Monsoon 2026: भारत की तरफ आ रहा 10 हजार किमी लंबा बादलों का झुंड, जानिए कब होगी झमाझम बारिश

Mon, 13 Jul 2026 01:59 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Monsoon 2026: भारत के कई इलाकों में बारिश कमजोर पड़ चुकी है। एक बार फिर लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा रहा है। लेकिन भारत की तरफ विशाल बादलों का झुड़ लौट रहा है, जिससे के बार फिर बारिश होने की उम्मीद है। 
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भारत की तरफ आ रहा 10 हजार किमी लंबा बादलों का झुंड - फोटो : AI
Monsoon 2026: भारत के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद मानसून कमजोर पड़ गया है। एक बार फिर लोग गर्मी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। इसके पीछे के एक बड़ी मौसमी घटना है। भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी से लेकर मध्य प्रशांत महासागर तक 7000 से 10000 किलोमीटर लंबा इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन (ITCZ) का निर्माण हो चुका है। इस जोन के भीतर कई ट्रॉपिकल सिस्टम है, जो तेजी से सक्रिय हो रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह भारत के नजदीक आता है, तो जुलाई के आखिरी सप्ताह में बारिश लौट सकती है। 

क्या है इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन? 

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पृथ्वी की भूमध्य रेखा के आसपास का वह इलाका है, जहां पर विभिन्न दिशाओं से आने वाली हवाएं आपस में मिलती हैं। यहां पर ट्रेड विंड्स उत्तर और दक्षिण से आकर आपस में टकराती हैं। इस इलाके में गर्म और नम हवा के ऊपर उठने पर बादलों का निर्माण होता है और भारी बारिश होती है। सामन्य तौर पर इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन मानसून के समय भारत के ऊपर आ जाता है, लेकिन इस बार यह पूर्व में बना हुआ है और  बंगाल की खाड़ी से लेकर मध्य प्रशांत तक फैला हुआ है। इसके भीतर कई ट्रॉपिकल सिस्टम हैं, जो उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ रहे हैं यानी भारत की तरफ। अगर इनमें एक भी सिस्टम ताकतवर होकर भारत आता है, तो फिर अच्छी बारिश होगी। 
 
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भारत की तरफ आ रहा 10 हजार किमी लंबा बादलों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
क्यों बनता है इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन? 

वैश्विक तापमान में बदलाव, समुद्र के सतह का तपामना बढ़ना और दूसरे जलवायु संबंधी कारकों ने इस बार इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन को पूर्व की तरफ खींच लिया। प्रशांत महासागर में बनने वाले अल नीनो जैसी स्थिति या अन्य पैटर्न भी इसकी वजह हो सकते हैं। यह जोन सामान्य से कही ज्यादा है, जो 7000 से 10000 किलोमीटर तक फैला है। इसके भीतर कई कम दबाव वाले क्षेत्र और उष्णकटिबंधीय तरंगें सक्रिय हैं। यह सिस्टम धीरे-धीरे बंगाल की खाड़ी की तरफ बढ़ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इनमें कुछ सिस्टम के बंगाल की खाड़ी पहुंचने मॉनसून ट्रफ लाइन हो सकती है। इससे भारत के पूर्वी, मध्य और उत्तरी इलाकों में अच्छी बारिश हो सकती है। हालांकि, अभी तय नहीं है कि यह सिस्टम कितना ताकतवार होगा और कितना बरसेगा।
 
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भारत की तरफ आ रहा 10 हजार किमी लंबा बादलों का झुंड - फोटो : Adobe Stock
कब है बारिश की उम्मीद? 

मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय मॉडल्स के मुताबिक, यब ट्रॉपिकल सिस्टम्स 20 से 30 जुलाई के बीच भारतीय उपमहाद्वीप को प्रभावित कर सकता है। अगर भारत के पास इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन आता है, तो मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। कम बारिश वाले राज्यों को राहत मिल सकती है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे इलाकों में बारिश लौट सकती है। हालांकि, यह संभवाना है कि सिस्टम बहुत ज्यादा ताकतवर बनकर चक्रवात बन जाए। इस स्थिति में भारी बारिश, बाढ़ और तूफान का खतरा बढ़ सकता है। इसकी वजह से मौसम विभाग की वजह से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

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भारत की तरफ आ रहा 10 हजार किमी लंबा बादलों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
मुख्य तौर पर भारतीय मॉनसून इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन की स्थिति पर निर्भर होता है। इसके उत्तर की तरफ जाने पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसूनी हवाएं भारत की तरफ आती हैं। इस बार इसके पूर्व में होने के कारण मॉनसून की प्रगति पर प्रभाव पड़ा है। अगर यह पश्चिम की तरफ बढ़ जाता है, तो मॉनसून की ट्रफ भी सक्रिय हो जाएगी।

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भारत की तरफ आ रहा 10 हजार किमी लंबा बादलों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
बीते कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन की वजह से इसका व्यवहार अनियमित होता जा रहै ह। कभी यह उत्तर की तरफ, तो कभी दक्षिण की तरफ चला जाता है। इसके कारण सूखा और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। जलवायु परिवर्तन की वजह से पुराने पैटर्न में बदलाव हो रहा है। इसलिए मौसम वैज्ञानिकों ने लिए मौसम की भविष्यवाणी करना मुश्किल हो रही है। 
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