Monsoon 2026: भारत के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद मानसून कमजोर पड़ गया है। एक बार फिर लोग गर्मी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। इसके पीछे के एक बड़ी मौसमी घटना है। भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी से लेकर मध्य प्रशांत महासागर तक 7000 से 10000 किलोमीटर लंबा इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन (ITCZ) का निर्माण हो चुका है। इस जोन के भीतर कई ट्रॉपिकल सिस्टम है, जो तेजी से सक्रिय हो रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह भारत के नजदीक आता है, तो जुलाई के आखिरी सप्ताह में बारिश लौट सकती है।
क्या है इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पृथ्वी की भूमध्य रेखा के आसपास का वह इलाका है, जहां पर विभिन्न दिशाओं से आने वाली हवाएं आपस में मिलती हैं। यहां पर ट्रेड विंड्स उत्तर और दक्षिण से आकर आपस में टकराती हैं। इस इलाके में गर्म और नम हवा के ऊपर उठने पर बादलों का निर्माण होता है और भारी बारिश होती है। सामन्य तौर पर इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन मानसून के समय भारत के ऊपर आ जाता है, लेकिन इस बार यह पूर्व में बना हुआ है और बंगाल की खाड़ी से लेकर मध्य प्रशांत तक फैला हुआ है। इसके भीतर कई ट्रॉपिकल सिस्टम हैं, जो उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ रहे हैं यानी भारत की तरफ। अगर इनमें एक भी सिस्टम ताकतवर होकर भारत आता है, तो फिर अच्छी बारिश होगी।