भारत में कैसे बनी पहचान
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भारत में कैसे बनी पहचान
भारत में मोमोज की असली एंट्री 1959 के बाद हुई, जब तिब्बती समुदाय के लोग यहां आकर बसे। धर्मशाला, दार्जिलिंग, सिक्किम और दिल्ली के मजनू का टीला जैसे इलाकों में उन्होंने अपने खानपान की परंपरा को जिंदा रखा।
शुरुआत में यह डिश केवल तिब्बती लोगों तक सीमित थी, लेकिन 90 के दशक के बाद यह धीरे-धीरे दिल्ली की गलियों में लोकप्रिय होने लगी। लोगों को इसका सॉफ्ट टेक्सचर और तीखी चटनी इतनी पसंद आई कि देखते ही देखते यह हर गली-मोहल्ले का फेवरेट स्ट्रीट फूड बन गया।