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Snake Facts: क्यों माम्बा सांप के काटने पर इलाज से और बिगड़ जाती है हालत? वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा

Wed, 08 Oct 2025 11:57 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Snake Facts: दुनिया में सांप की तीन हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कुछ बेहद जहरीले और खतरनाक होते हैं। अब इस बीच माम्बा सांप को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 
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क्यों माम्बा सांप के काटने पर इलाज से और बिगड़ जाती है हालत? - फोटो : Adobe Stock
Snake Facts: दुनिया में सांप की तीन हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कुछ बेहद जहरीले और खतरनाक होते हैं। अब इस बीच माम्बा सांप को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस सांप में एंटीवेनम (विष-निवारक दवा) देने के बाद मरीज की हालत कभी-कभी और खराब हो जाती है। इस वजह इस सांप के विष में दो तरह के टॉक्सिन (विष तत्व) पाए जाते हैं। एंटीवेनम से एक को तो ठीक होता है, लेकिन दूसरे को जगा देता है। वैज्ञानिकों की यह खोज 26 सितंबर को 'टॉक्सिन्स' जर्नल में प्रकाशित हुई है। वैज्ञानिकों की यह खोज अफ्रीका में हर साल  30,000 से ज्यादा सांप काटने से होने वाली मौतों को रोकने में मदद कर सकती है। 

क्या है माम्बा सांप? 

दुनिया के सबसे खतरनाक सांप माम्बा डेंड्रोएस्पिस जीनस के चार प्रजाति के होते हैं, जिनमें ब्लैक माम्बा, वेस्टर्न ग्रीन, जेम्सन और ईस्टर्न ग्रीन शामिल हैं। इनमें ब्लैक माम्बा सबसे खतरनाक है, जिसके काटने 100 फीसदी मौत तय है। इस सांप के दो बूंद जहर से ही मौत हो सकती है। 
 
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क्यों माम्बा सांप के काटने पर इलाज से और बिगड़ जाती है हालत? (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
सब-सहारा अफ्रीका (साहेलियन इलाके) में यह सांप पाए जाते हैं। इनका जहर न्यूरोटॉक्सिन से भरा होता है, जो नर्व सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर हमला करता है। बिना इलाज के एक घंटे में श्वास नली लकवाग्रस्त हो जाती है और दिल की धड़कन रुक जाती है। मरीज चल नहीं पाता और सांस नहीं ले पाता है। 
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क्यों माम्बा सांप के काटने पर इलाज से और बिगड़ जाती है हालत? (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

दो प्रकार होते हैं विष?

लकवा और एठन में कौन ज्यादा खतरनाक? 

माम्बा सांप का जहर मांसपेशियों के नर्व रिसेप्टर्स (नर्व सिग्नल रिसीवर) पर हमला करता है। ब्रेन से सिग्नल मांसपेशियों तक नहीं पहुंच पाता है। क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के मॉलेक्यूलर बायोलॉजिस्ट ब्रायन फ्राई का कहना है कि मांसपेशियां सिकुड़ ही नहीं पातीं, जिसे फ्लेसिड पैरालिसिस (लकवा) कहा जाता है।

फ्लेसिड पैरालिसिस

इसमें मांसपेशियां ढीली हो जाती है। वेस्टर्न ग्रीन, जेम्सन और ब्लैक माम्बा के जहर का यह प्रमुख प्रभाव है। इंसान के लिए सांस लेना कठिन हो जाता है। 

स्पास्टिक पैरालिसिस

इसमें नर्व सिग्नल्स ओवरलोड हो जाते हैं। मांसपेशियां ऐंठन से सिकुड़ जाती हैं और सांस नली बंद हो जाती है। वैज्ञानिकों को पहले लगता था कि यह सिर्फ ईस्टर्न ग्रीन माम्बा में होता है। फ्राई का कहना है कि स्पास्टिक पैरालिसिस घातक है, लेकिन फ्लेसिड ज्यादा तेजी से असर करता है। 

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क्यों माम्बा सांप के काटने पर इलाज से और बिगड़ जाती है हालत? (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
क्यों इलाज से मरीज की और हालत बिगड़ जाती है? 

अन्य तीन माम्बा सापों में सिर्फ फ्लेसिड पाया जाता है। हालांकि, फ्राई की टीम ने लैब एनिमल्स के न्यूरोमस्कुलर टिश्यू पर जांच किया। जांच में सामने आया कि विष डालने पर अन्य माम्बा सांपों का प्रभाव नहीं दिखाई दिया, लेकिन स्टिमुलेशन पर मांसपेशियां सिकुड़ ही नहीं पाईं। एंटीवेनम (अफ्रीका में उपलब्ध तीन ब्रांड्स) ने फ्लेसिड को अच्छी तरह ठीक कर दिया, लेकिन तभी स्पास्टिक पैरालिसिस उभर आया। एंटीवेनम से पहले टॉक्सिन ठीक किया, तो छिपा हुआ दूसरा टॉक्सिन सक्रिय हो गया। एंटीवेनम स्पास्टिक के खिलाफ कमजोर पड़ गया। फ्राई ने बताया कि हमेशा बैकग्राउंड में स्पास्टिक हो रहा था, लेकिन फ्लेसिड ने छिपा लिया। 

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क्यों माम्बा सांप के काटने पर इलाज से और बिगड़ जाती है हालत? (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
केन्या बनाम साउथ अफ्रीका के ब्लैक माम्बा का जहर

सांप का जहर जगह के मुताबिक, अलग-अलग होता है। केन्या और साउथ अफ्रीका के सांपों का विष टिश्यू पर अलग असर डालता है। एंटीवेनम भी अलग तरीके से काम करता है। डेनमार्क के बायोटेक्नोलॉजिस्ट एंड्रियास हॉगार्ड लॉस्टेन-किल ने बताया कि जहर का अंतर समझकर एंटीवेनम बनाना जरूरी है, जिससे हर टॉक्सिन के खिलाफ काम करे।
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