फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Naga Sadhu: अमृत स्नान के बाद महाकुंभ से लौटने लगे नागा साधु, जानिए अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे?

Wed, 19 Feb 2025 01:14 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Naga Sadhu: महाकुंभ में सबसे ज्यादा नागा साधु आकर्षण का केंद्र होते हैं। सनातन धर्म में नागा साधुओं को धर्म का रक्षक माना जाता है। नागा साधुओं को 12 वर्षों की कठोर तपस्या करनी पड़ती है। नागा साधु भगवान शिव के वैरागी स्वरूप की पूजा करते हैं।
विज्ञापन
1 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : अमर उजाला
Naga Sadhu: उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में गंगा, युमना और सरस्वती नदी के संगम तट पर दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला महाकुंभ चल रहा है। गंगा, युमना और सरस्वती नदी के संगम में अभी तक करीब 56 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी 2025 को हुई थी, जो 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान करने के लिए साधु-संतों के अलावा दुनियाभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने अब दावा किया है कि अगर ऐसी ही भीड़ आती रही है, तो महाकुंभ में इस बार 60 करोड़ से अधिक लोग पहुंच सकते हैं। 

महाकुंभ में सबसे ज्यादा नागा साधु आकर्षण का केंद्र होते हैं। सनातन धर्म में नागा साधुओं को धर्म का रक्षक माना जाता है। नागा साधुओं को 12 वर्षों की कठोर तपस्या करनी पड़ती है। नागा साधु भगवान शिव के वैरागी स्वरूप की पूजा करते हैं। महाकुंभ में देशभर से नागा साधु पहुचे हैं, जो लोगों के लिए सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र हैं। नागा साधु, बिना कपड़े के, शरीर पर भस्म और लंबी जटाओं की वजह से भीड़ में सबसे अलग नजर आते हैं। वसंत पचंमी के आखिरी अमृत स्नान के बाद अब नागा साधु लौटने लगे हैं। हालांकि, कुछ अखाड़ों के नागा साधु 12 फरवरी से प्रस्थान करेंगे। अपनी इस खबर में बताते हैं कि अब नागा साधु कहां जाएंगे और क्या करेंगे। 
 
विज्ञापन

2 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : अमर उजाला।
लौटने से पहले कढ़ी पकौड़ी का भंडारा करते हैं नागा साधु

प्रस्थान से पहले नागा साधु परंपरा के मुताबिक, कढ़ी-पकौड़ी का भंडारा करते हैं। इसके बाद वह अपने शिविर में लगे धर्म ध्वज की डोर भी ढीली कर देते हैं। अखाड़े के मुताबिक, नागा कढ़ी पकौड़ी का भंडारा करते हैं। यह परंपरा सदियों से चल रही है। 
 
विज्ञापन

3 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : अमर उजाला।
अब कहा जाएंगे नागा साधु

26 फरवरी को महाशिवरात्रि है। ऐसे में 13 में से 7 अखाड़े महाकुंभ से सीधे काशी जाएंगे। यहां पर महाशिवरात्रि तक अपना डेरा जमाएंगे। इसके बाद वे अपने-अपने अखाड़ों में वापस लौट जाएंगे। महाशिवरात्रि के मौके पर नागा साधु काशी में शोभायात्रा निकालेंगे। मसाने की होली खेलेंगे और गंगा स्नान करेंगे।
 

4 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : अमर उजाला।
नागा साधु बनने में कितना लगता है समय?

नागा साधु बनने के लिए 12 वर्ष कठिन तपस्या करनी पड़ती है। नागा साधुओं का जीवन बेहद ही जटिल होता है। बताया जाता है कि किसी भी इंसान को नागा साधु बनने में 12 साल का लंबा समय लगता है। नागा साधु बनने के बाद वह गांव या शहर की भीड़भाड़ भरी जिंदगी को त्याग देते हैं और रहने के लिए पहाड़ों पर जंगलों में चले जाते हैं। उनका ठिकाना उस जगह पर होता है, जहां कोई भी न आता जाता हो। अखाड़ों में नागा साधु को अनुशासन और संगठित जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है।

Ajab Gajab: महाकुंभ में बच्चे खोने के डर से दंपति ने निकाली अनोखी तरकीब, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
विज्ञापन

5 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : अमर उजाला।
नागा साधु बनने की प्रक्रिया में 6 साल बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान वह नागा साधू बनने के लिए जरूरी जानकारी हासिल करते हैं। इस अवधि में वह सिर्फ लंगोट पहनते हैं। वह कुंभ मेले में प्रण लेते हैं जिसके बाद लंगोट को भी त्याग देते हैं और पूरा जीवन कपड़ा धारण नहीं करते हैं। सबसे खास बात यह है कि वह बिस्तर पर नहीं सोते हैं। 

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ का सबसे पहले कब और कहां हुआ था आयोजन, जानिए कुंभ के इतिहास से जुड़े रहस्य
विज्ञापन

6 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : अमर उजाला।
नागा साधु बनने की प्रक्रिया की शुरुआत में सबसे पहले ब्रह्मचर्य की शिक्षा लेनी होती है। इसमें सफलता प्राप्त करने के बाद महापुरुष दीक्षा दी जाती है। इसके बाद यज्ञोपवीत होता है। इस प्रकिया को पूरी करने के बाद वह अपना और अपने परिवार का पिंडदान करते हैं जिसे बिजवान कहा जाता है।

Naga Sadhu: नागा साधुओं के शव को नहीं जलाया जाता है, जानिए आखिर कैसे किया जाता है उनका अंतिम संस्कार
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
महाकुंभ के बाद अब कहां जमाएंगे डेरा और क्या करेंगे नागा साधु? - फोटो : Adobe Stock
नागा साधुओं को एक दिन में सिर्फ सात घरों से भिक्षा मांगने की इजाजत होती है। अगर उनको इन घरों में भिक्षा नहीं मिलती है, तो उनको भूखा ही रहना पड़ता है। नागा संन्यासी दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करते हैं। नागा साधू हमेशा नग्न अवस्था में रहते हैं और युद्ध कला में पारंगत होते हैं। यह अलग-अलग अखाड़ों में रहते हैं। नागा साधू अपना भोजन खुद बनाते हैं। अपने दिगंबर रूप की वजह से प्रसिद्ध होते हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें