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VK Singh Exclusive: 'तारबंदी का मकसद घुसपैठ और तस्करी रोकना', पढ़ें मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह से खास बातचीत

सार

भारत और म्यांमार सीमा को इंडो-म्यांमार बॉर्डर कहा जाता है। म्यांमार के साथ भारत 1643 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश (520 किलोमीटर), नगालैंड (215 किलोमीटर), मणिपुर (398 किलोमीटर) और मिजोरम (510 किलोमीटर) सीमा साझा करता है।
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VK Singh - फोटो : Amar Ujala
मिजोरम एक सीमावर्ती राज्य है। जहां तक इंडो-म्यांमार सीमा पर तारबंदी की बात है तो यह मैं पिछले करीब 20 वर्षों से सुना रहा हूं। यह समझना होगा कि सीमा ही नहीं बल्कि एक ही समुदाय के लोग सीमा के उस पार म्यांमार में भी हैं और इस पार भारत में भी रहते हैं। तारबंदी का मकसद अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकना है, न कि सीमा के दोनों ओर बसे परिवारों मिलने से रोकना। आवागमन पर कोई रोक नहीं होगी। भारत सरकार कोई ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी, जिससे जनमानस को कोई परेशानी हो। साथ ही म्यांमार जो अस्थिरता बनी हुई है, उसका असर भारत पर नहीं पड़े इसका भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। यह बात मिजोरम की राजधानी आइजोल में अमर उजाला से खास बातचीत में राज्य के राज्यपाल जनरल (डॉ.) वीके सिंह (सेवानिवृत्त) ने कही। उन्होंने कहा, 'तारबंदी को लेकर यहां की सरकार गंभीर है।'
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VK Singh - फोटो : Amar Ujala
तस्करों को रोकना है मकसद, परिवारों को नहीं
राज्यपाल ने कहा कि तारबंदी की बात आज की नहीं है। मैं कई वर्षों से सुन रहा हूं। एक ही समुदाय के लोग भारत में भी और म्यांमार भी रहते हैं। चाहे वह मिजोरम हो, नगालैंड या फिर मणिपुर हो। साथ ही जो अस्थिरता म्यांमार है, जिस तरह वहा चीजें घट रही हैं। उनको देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से लगता है कि कुछ न कुछ हमको करना चाहिए। ताकि उधर, जो खलबली और अस्थिरता है, हमारी तरफ न आए। सबसे बड़ी बात है कि इसका समाधान कैसे किया जाए। लोगों को लगता है कि सबसे आसान तरीका है तारबंदी कर दो, समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके अलावा भी बहुत सी चीजें करने की जरूरत है। मेरा मानना है कि इन चीजों को ज्यादा तुल नहीं देना चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी से परहेज करने की जरूरत है। जब जमीन पर कुछ हो तब उसकी बात करनी चाहिए। अभी केवल मणिपुर के एक हिस्से में मोरेह के आसपास दस किलोमीटर के आसपार तारबंदी हुई है। इसके पीछे मादक पदार्थ और कई तरह का इतिहास है। वहां तस्करी का बड़ा अड्डा बन गया था। इसलिए वहां पर तारबंदी की गई है। ताकि सुरक्षाबल तस्करों को रोक सके। परिवारों को नहीं। यह फर्क लोगों को समझाना चाहिए।
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VK Singh - फोटो : Amar Ujala
मिजोरम सरकार कर रही है पूरी कोशिश
राज्यपाल ने कहा, 'जहां तक तारबंदी को लेकर मिजोरम सरकार की बात है, तो मिजोरम सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। मिजोरम सरकार उस तरफ वाली अस्थिरता वाली वातावरण में जहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वे बच्चे मिजोरम सीमा के पास आकर पढ़ते हैं। कई वहां पर शरणार्थी हैं, बच्चे भी एक तरह से शरणार्थी ही हुए। भारत की एक नीति रही है। अगर कोई शरण के लिए आता है तो उसको सोच समझ कर शरण दी जाती है। जब वहां पर अस्थिरता खत्म हो जाती है तो उनको वहां जाने के लिए कहा जाता है। मिजोरम सरकार इस पर ध्यान दे रही है, लोगों के मन में जो शंकाएं हैं, उसे दूर करने की कोशिश कर रही है। समस्या का समाधन हो, पूरी कोशिश कर रही है।'

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VK Singh - फोटो : Amar Ujala
मुख्यधारा से जुड़ रहा है पूर्वोत्तर का युवा
सिंह ने कहा, 'देखिए अब धीरे-धीरे मिजोरम सहित पूर्वोत्तर का युवा मुख्य धारा से जुड़ रहा है। आज खेल-कूद में पूर्वोत्तर भारत के युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। मेडल जीत रहे हैं। खेलों के अंदर वर्चस्व बढ़ रहा है। इस चीज को जितना हम प्रमोट करेंगे, युवाओं को खेल-कूद के प्रति हम जितना उत्साह पैदा करेंगे, उतना यहां के युवा मादक पदार्थों से दूर होगा और देश का नाम पूरे विश्व में रोशन करेगा।'
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VK Singh - फोटो : Amar Ujala
पूर्वोत्तर है अष्टलक्ष्मी, कुछ वर्षों में हुई अभूतपूर्व तरक्की
राज्यपाल ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर ने अभूतपूर्व तरक्की की है। मैंने पूर्वोत्तर को बहुत करीब से देखा है। मैं अपनी सेवा के दौरान पूर्वोत्तर में रहा हूं। मुझे एमओएस के रूप में पूर्वोत्तर की सेवा करने का सौभाग्य मिला है। पूरे पूर्वोत्तर में सड़कों का जाल बिछ रहा है। हर राज्य अब हवाई मार्ग से देश की राजधानी से जुड़ रहा है। हर राज्य को रेलवे नेटवर्क से देश की राजधानी से जोड़ने का प्रयास जारी है। केंद्र सरकार के मंत्री हर महीने पूर्वोत्तर का दौरा कर रहे हैं। जिलों में जाकर रूकते हैं। समस्याओं को समझते हैं और समाधान के लिए रोडमैप बनाए जा रहे हैं। यही नहीं केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरकी हो, इसके लिए समय सीमा भी तय की गई है। जो जुड़ाव पूर्वोत्तर के साथ आज है, पहले कभी नहीं था। उन्होंने कहा, इसलिए चाहे यहां की प्राकृतिक संपदा हो, खनिज पदार्थ हो या फिर यहां के लोग। इन सबको मिलाकर ही समग्र रूप में पूर्वोत्तर को अष्टलक्ष्मी का नाम दिया गया।'
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भारत-म्यांमार सीमा - फोटो : Amar Ujala
क्या है तारबंदी का मामला?
भारत और म्यांमार सीमा को इंडो-म्यांमार बॉर्डर कहा जाता है। म्यांमार के साथ भारत 1643 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश (520 किलोमीटर), नगालैंड (215 किलोमीटर), मणिपुर (398 किलोमीटर) और मिजोरम (510 किलोमीटर) सीमा साझा करता है। अवैध घुसपैठ, हथियार, मादक पदार्थ की तस्करी को रोकने और म्यांमार में जारी अस्थिरता के चलते केंद्र सरकार ने 6 फरवरी, 2024 को इन सीमा क्षेत्रों में 31,000 करोड़ रुपए खर्च कर बाड़ लगाने का फैसला किया है। हालांकि कुछ राज्यों में इसका विरोध हो रहा है।
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सीमा पर बाड़ेबंदी - फोटो : Amar Ujala
क्यों हो रहा है विरोध?
बाड़ को लेकर लोगों के मन में कई आशंकाएं हैं। छात्र, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोगों का कहना है कि हमारे समुदाय के लोग म्यांमार में भी रहते हैं। उनके कई पुश्तैनी और ऐतिहासिक स्थल म्यांमार के चिन राज्य में हैं। अगर फेंसिंग लग गई तो फिर मुक्त आवाजाही समझौते (फ्री मुवमेंट रिजेम, एफएमआर) का क्या होगा। फेंसिंग लगने के बाद फिर दोनों देशों के लोग एक-दूसरे देशों के बॉर्डर से 16-16 किलोमीटर तक अंदर तक नहीं आ-जा सकेंगे। इसके लिए उन्हें पासपोर्ट या वीजा की जरूरत पड़ेगी। सीमांत के लोगों का कहना है कि कितने ही लोगों के घर, खेत, बिजनेस और परिवार सीमा इलाके में हैं। बाड़ लगने से विरासत को नुकसान पहुंचेगा। हम अपने बच्चों को बंटते नहीं देख सकते।
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