राजेश्वर, बर्फानी, खिचड़ी और खूनी नागा साधु में क्या होता है अंतर
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अखाड़ों की अपनी होती है भाषा
भारत में कुल 13 अखाड़ें हैं। जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, पंचाग्नि अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा, उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा, उदासीन नया अखाड़ा, निर्मल पंचायती अखाड़ा और निर्मोही अखाड़ा। सभी अखाड़ों की अलग-अलग परंपरा है। अखाड़ों की अपनी भाषा भी होती है। अखाड़ों की जानकारी रखने वाले के मुताबिक, अखाड़ों में आटा को भस्मी, दाल को पनियाराम, लहसुन को पाताललौंग, नमक को रामरस, मिर्च को लंकाराम, प्याज को लड्डूराम और घी को पानी कहते हैं। खाना खाने जाने को हरिहर कहा जाता है।