फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maha Kumbh 2025: क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? जानिए कैसे बनते हैं और कब से शुरू हुई इनकी परंपरा

Wed, 15 Jan 2025 04:13 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Maha Kumbh 2025: नागा साधुओं की दुनिया बेहद रहस्यमयी होती है। सबसे खास बात है कि नागा साधु कपड़े नहीं धारण करते हैं। वह कड़कड़ाती ठंड में भी नग्न अवस्था में ही रहते हैं। वह शरीर पर धुनी या भस्म लगाकर घूमते हैं।
विज्ञापन
1 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
Maha Kumbh 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत होगी, जो 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। इसके कारण संगम की नगरी प्रयागराज दुनियाभर में छाया हुआ है। महाकुंभ की तैयारियां जोरो-शोरो से चल रही हैं। महाकुंभ मेले में साधु संत पहुंचने लगे हैं। सनातन धर्म में साधु-संतों का काफी महत्व है। हालांकि, कुंभ में आने वाले नागा साधु लोगों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होते हैं। कुंभ की कल्पना तक नागा साधुओं के बिना नहीं की जा सकती है। नागा साधुओं की वेशभूषा और खान-पान आम लोगों से बिल्कुल अलग होती है। हम आपको बताएंगे कि नागा साधु कैसे बनते हैं और कहां रहते हैं। 

कपड़े नहीं धारण करते हैं नागा साधू

नागा साधुओं की दुनिया बेहद रहस्यमयी होती है। सबसे खास बात है कि नागा साधु कपड़े नहीं धारण करते हैं। वह कड़कड़ाती ठंड में भी नग्न अवस्था में ही रहते हैं। वह शरीर पर धुनी या भस्म लगाकर घूमते हैं। नागा का मतलब होता है नग्न। नागा संन्यासी पूरा जीवन नग्न अवस्था में ही रहते हैं। वह अपने आपको भगवान का दूत मानते हैं। 

 
विज्ञापन

2 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
नागा संन्यासी बनने की प्रक्रिया

नागा संन्यासी बनने की प्रक्रिया बहुत लंबी और कठिन होती है। अखाड़ों द्वारा नागा संन्यासी बनाए जाते हैं। हर अखाडे़ की अपनी मान्यता और पंरपरा होती है और उसी के मुताबिक, उनको दीक्षा दी जाती है। कई अखाड़ों में नागा साधुओं को भुट्टो के नाम से भी बुलाया जाता है। अखाड़े में शामिल होने के बाद इनको गुरु सेवा के साथ सभी छोटे काम करने के लिए दिए जाते हैं। 
विज्ञापन

3 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
बेहद जटिल होता है जीवन 

नागा साधुओं का जीवन बेहद ही जटिल होता है। बताया जाता है कि किसी भी इंसान को नागा साधू बनने में 12 साल का लंबा समय लगता है। नागा साधू बनने के बाद वह गांव या शहर की भीड़भाड़ भरी जिंदगी को त्याग देते हैं और रहने के लिए पहाड़ों पर जंगलों में चले जाते हैं।

उनका ठिकाना उस जगह पर होता है, जहां कोई भी न आता जाता हो। नागा साधू बनने की प्रक्रिया में 6 साल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान वह नागा साधू बनने के लिए जरूरी जानकारी हासिल करते हैं। इस अवधि में वह सिर्फ लंगोट पहनते हैं। वह कुंभ मेले में प्रण लेते हैं जिसके बाद लंगोट को भी त्याग देते हैं और पूरा जीवन कपड़ा धारण नहीं करते हैं।

4 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
ब्रह्मचर्य की शिक्षा 

नागा साधु बनने की प्रक्रिया की शुरुआत में सबसे पहले ब्रह्मचर्य की शिक्षा लेनी होती है। इसमें सफलता प्राप्त करने के बाद महापुरुष दीक्षा दी जाती है। इसके बाद यज्ञोपवीत होता है। इस प्रकिया को पूरी करने के बाद वह अपना और अपने परिवार का पिंडदान करते हैं जिसे बिजवान कहा जाता है। वह 17 पिंडदान करते हैं जिसमें 16 अपने परिजनों का और 17 वां खुद का पिंडदान होता है। अपना पिंडदान करने के बाद वह अपने आप को मृत सामान घोषित करते हैं जिसके बाद उनके पूर्व जन्म को समाप्त माना जाता है। पिंडदान के बाद वह जनेऊ, गोत्र समेत उनके पूर्व जन्म की सारी निशानियां मिटा दी जाती हैं।
विज्ञापन

5 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
बिस्तर पर नहीं सोते हैं नागा संन्यासी

इसके कारण नागा साधुओं के लिए सांसारिक जीवन का कोई महत्व नहीं होता है। नागा संन्यासी अपने समुदाय को ही अपना परिवार मानते हैं। वह कुटिया बनाकर रहते हैं और इनकी कोई विशेष जगह और घर नहीं होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि नागा साधु सोने के लिए बिस्तर का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। 

Interesting Facts: दुनिया के कुछ रोचक और हैरान करने वाले तथ्य, जिनके बारे में जानकर नहीं कर पाएंगे यकीन
विज्ञापन

6 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
युद्ध कला में पारंगत होते हैं

नागा साधुओं को एक दिन में सिर्फ सात घरों से भिक्षा मांगने की इजाजत होती है। अगर उनको इन घरों में भिक्षा नहीं मिलती है, तो उनको भूखा ही रहना पड़ता है। नागा संन्यासी दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करते हैं। नागा साधु हमेशा नग्न अवस्था में रहते हैं और युद्ध कला में पारंगत होते हैं। यह अलग-अलग अखाड़ों में रहते हैं। जूना अखाड़े में सबसे ज्यादा नागा संन्यासी रहते हैं। आदिगुरु शंकराचार्य ने अखाड़े में नागा साधुओं के रहने की परंपरा की शुरुआत की थी। 

Ajab-Gajab: भारत का अनोखा गांव, जहां एक-दूसरे को नाम से नहीं बल्कि सीटी बजाकर बुलाते हैं लोग, जानिए क्या है वजह


 
विज्ञापन

7 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
नागा साधुओं के पास रहस्यमयी शक्तियां होती हैं

बताया जाता है कि नागा साधुओं के पास रहस्यमयी शक्तियां होती हैं। वह कठोर तपस्या करने के बाद इन शक्तियों को हासिल करते हैं। लेकिन कहा जाता है कि वह कभी भी अपनी इन शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं करते हैं। वह अपनी शक्तियों से लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। 

Predictions 2025: कोरोना और ट्रंप की जीत की भविष्यवाणी करने वाले शख्स ने दी 'तीसरे विश्व युद्ध' की चेतावनी, जानिए क्या होने वाला है

 

8 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
हिंदू धर्म में किसी भी इंसान की मौत के बाद उसके मृत शरीर को जलाने की मान्यता है जो सदियों से चली आ रही है। लेकिन नागा साधुओं के शव को नहीं जलाया जाता है। नागा संन्यासियों का मृत्यू के बाद भू-समाधि देकर अंतिम संस्कार किया जाता है। नागा साधुओं को सिद्ध योग की मुद्रा में बैठाकर भू-समाधि दी जाती है।

Mahakumbh 2025: कौन हैं महाकुंभ मेले में चर्चा का विषय बने तीन फीट के छोटू बाबा, 32 साल से नहीं किया स्नान
 
विज्ञापन

9 of 9
क्या है नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया? - फोटो : Adobe Stock
कब और कैसे शुरू हुई नागा संन्यासी की परंपरा

धार्मिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र है कि आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म की मान्यताओं और मंदिरों को खंडित किया जा रहा था। यह देखकर आदि गुरु शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की और वहीं से सनातन धर्म की रक्षा का दायित्व संभाला। इसके बाद आदि गुरु शंकराचार्य को लगा कि सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए सिर्फ शास्त्र ही काफी नहीं हैं, शस्त्र की भी जरूरत है। तब उन्होंने अखाड़ा परंपरा की शुरुआत की। इसमें धर्म की रक्षा के लिए मर-मिटने वाले संन्यासियों को प्रशिक्षण देनी शुरू की गई। नागा साधुओं को उन्हीं अखाड़ों का धर्म रक्षक माना जाता है। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें