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Snail Race: इस शहर में होती है घोंघों की रेस, धीमी जिंदगी का जश्न मनाते हैं यहां के लोग

Wed, 06 May 2026 04:04 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

हुलिएन काउंटी में बसा फेंगलिन शहर तेज जिंदगी के बजाय सुकून भरे जीवन को अपनाता है। यहां लोग हर पल को आराम से जीने में विश्वास रखते हैं, और यही वजह है कि यहां होने वाली अनोखी “घोंघा रेस” पूरे देश में चर्चा बटोर रही है।
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इस शहर की अनोखी घोंघा रेस - फोटो : AI
Fenglin Snail Race: आज की दुनिया में जहां हर कोई घड़ी की सुइयों से आगे निकलने की दौड़ में लगा है, वहीं कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो इस रफ्तार को चुनौती देती हैं। यहां के लोगों का मानना है कि जिंदगी सिर्फ तेज भागने का नाम नहीं, बल्कि ठहरकर उसे महसूस करने का भी हुनर है। इसी सोच को जीता है ताइवान का एक छोटा-सा शहर, जो “धीमेपन” को अपनी पहचान बना चुका है।

हुलिएन काउंटी में बसा फेंगलिन शहर तेज जिंदगी के बजाय सुकून भरे जीवन को अपनाता है। यहां लोग हर पल को आराम से जीने में विश्वास रखते हैं, और यही वजह है कि यहां होने वाली अनोखी “घोंघा रेस” पूरे देश में चर्चा बटोर रही है। जिस घोंघे की चाल को आमतौर पर धीमेपन का प्रतीक माना जाता है, उसी को इस शहर ने अपने गौरव का हिस्सा बना लिया है।

फेंगलिन में घोंघा सिर्फ एक जीव नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक फिलॉसफी है। करीब 10 हजार की आबादी वाला यह शहर साल 2014 में ‘स्लो सिटी नेटवर्क’ से जुड़ा था, जो संतुलित और शांत जीवनशैली को बढ़ावा देता है। इस नेटवर्क का प्रतीक भी घोंघा ही है, जो धैर्य, सादगी और सुकून का संदेश देता है।
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घोंघा रेस का आयोजन - फोटो : adobestock
घोंघा रेस का आयोजन 
साल 2024 में आए भूकंप के बाद यहां का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ। जब पर्यटकों की संख्या घटने लगी, तो स्थानीय लोगों ने अपनी इसी खास पहचान को दोबारा जीवंत करने का फैसला किया। नतीजा, पांच साल के अंतराल के बाद फिर से भव्य घोंघा रेस का आयोजन किया गया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
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ब्रदर स्नेल ने जीती रेस - फोटो : adobestock
ब्रदर स्नेल ने जीती रेस
रेस का अंदाज भी उतना ही अनोखा है जितना इसका विचार। एक गोल मेज के बीच घोंघों को रखा जाता है, और जो घोंघा सबसे पहले 33 सेंटीमीटर दूर किनारे तक पहुंचता है, वही विजेता बनता है। इस बार ‘ब्रदर स्नेल’ नाम के घोंघे ने सिर्फ 3 मिनट 3 सेकंड में यह दूरी तय कर जीत अपने नाम की।
 

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स्नेल खाते हैं खास डाइट - फोटो : adobestock
स्नेल खाते हैं खास डाइट
दिलचस्प बात यह है कि प्रतिभागी अपने घोंघों की खास देखभाल करते हैं। उन्हें ताजे फल, सब्जियां और शकरकंद के पत्ते खिलाए जाते हैं, ताकि वे “फिट” रहें। कुछ लोग तो अपने घोंघों के साथ लंबा सफर तय कर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचते हैं, जैसे एक कपल, जो अपने ‘जायंट अफ्रीकन स्नेल’ के साथ करीब पांच घंटे की यात्रा करके यहां आया।

हालांकि फेंगलिन की खूबसूरती सिर्फ इस रेस तक सीमित नहीं है। यहां ई-बाइक टूर, जापानी दौर की पुरानी इमारतें, ऐतिहासिक तंबाकू गोदाम और हक्का संस्कृति भी लोगों को आकर्षित करती है। हरियाली से घिरा यह शांत शहर उन लोगों के लिए किसी राहत की तरह है, जो भागदौड़ से दूर कुछ पल सुकून के तलाशते हैं।
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धीमी रफ्तार की सराहना - फोटो : adobestock
धीमी रफ्तार की सराहना
इस अनोखे आयोजन के पीछे मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश छिपा है, हर वक्त तेज भागना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी धीमे कदमों से चलकर ही जिंदगी की असली खूबसूरती को महसूस किया जा सकता है। फेंगलिन मानो यही कहता है, रफ्तार कम करो, मुस्कुराओ और जिंदगी को उसके असली रंग में जीओ।

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