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कुंभ में छाए 'चाबी वाले बाबा', इस वजह से 20 किलो की चाबी लेकर चलते हैं साथ में

Wed, 23 Jan 2019 05:04 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Chabi wale baba - फोटो : Social media
पूरी कुंभ नगरी इस वक्त बाबाओं से भरी पड़ी है। इनमें कुछ अनोखे बाबा भी हैं, जो अपने अनोखे अंदाज से लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं 'चाबी वाले बाबा', जो अपने एक हाथ में 20 किलो की लोहे की चाबी लेकर घूम रहे हैं। इस भारी-भरकम चाबी की कहानी भी बड़ी ही रहस्यमयी है। यही कारण है कि लोग इन्हें रहस्यमई चाबी वाले बाबा के नाम से जानते हैं। 
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Chabi wale baba - फोटो : Social media
चाबी वाले बाबा की खासियत ये है कि यह पूरे देश में पैदल ही यात्राएं करते रहते हैं और नए युग की कल्पना को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। चाबी वाले बाबा का असली नाम हरिश्चंद्र विश्वकर्मा (45) है। वो उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले हैं। 
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Chabi wale baba - फोटो : Social media
कहते हैं कि हरिश्चंद्र विश्वकर्मा का बचपन से ही आध्यात्म की ओर झुकाव हो गया था। हालांकि घरवालों के डर से वो कुछ बोल नहीं पाते थे, लेकिन आखिरकार जब वो 16 साल के हुए तो उन्होंने समाज में फैली बुराइयों और नफरत से लड़ने का फैसला कर लिया और घर से निकल गए। चूंकि हरिश्चंद्र विश्वकर्मा कबीरपंथी विचारधारा के थे, इसलिए लोग उन्हें कबीरा बाबा बुलाने लगे। 

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Chabi wale baba - फोटो : Social media
कबीरा बाबा कई साल से अपने साथ एक चाबी लिए हुए हैं। उस चाबी के साथ ही उन्होंने पूरे देश की पदयात्रा कर ली है। अपनी यात्रा और आध्यात्म के बारे में कबीरा बाबा बताते हैं कि उन्होंने सत्य की खोज की है। लोगों के मन में बसे अहंकार का ताला वह अपनी बड़ी सी चाबी से खोलते हैं। वह लोगों के अहंकार को चूर-चूर कर उन्हें एक नया रास्ता दिखाते हैं। 
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Chabi wale baba - फोटो : Social media
चाबी वाले बाबा स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मनाते हैं। उनका कहना है कि आध्यात्म की ओर पूरी दुनिया भाग तो रही है, लेकिन आध्यात्म कहीं बाहर नहीं है बल्कि वो इंसान के अंदर ही बसा है। उन्होंने अपनी चाबी के बारे में बताते हुए कहा कि इस चाबी में आध्यात्म और जीवन का राज छिपा है, जिसे वह लोगों को बताना चाहते हैं। 
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Chabi wale baba - फोटो : Social media
कबीरा बाबा का कहना है कि इस चाबी के राज के बारे में कोई जानना नहीं चाहता है, क्योंकि इसके लिए किसी के पास समय नहीं है। वो कहते हैं कि अगर वह किसी को रोककर कुछ कहते हैं तो लोग यह कहकर मुंह फेर लेते हैं कि बाबा मेरे पास छुट्टे पैसे नहीं हैं। शायद लोगों को लगता है कि मैं उनसे पैसे मांग रहा हूं, लेकिन असल बात ये है कि मैंने समाज में फैली बुराईयों और भ्रष्टाचार को खत्म कर एक नए युग की कल्पना की है और उसके लिये मैंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है।
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