आपको बता दें कि कंजरभाट समुदाय एक घुमक्कड़ कबीले को कहते हैं, जो संपूर्ण उत्तर भारत की ग्राम्य और नागरकि जनसंख्या में छितराया हुआ है। ये संभवत: द्रविड़ मूल के हैं। 'कंजर' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत 'कानन-चर' से हुई भी बताई जाती है। महाराष्ट्र में इस समुदाय का उत्तर भारत के पंजाब, राजस्थान से अपनी घुम्मकड़ प्रवृति के कारण आगमन हुआ है। इनकी भाषा हिंदी और गुजराती मिश्रित बोली है। इनका पारंपरिक व्यवसाय कलाबाजी-मनोरंजन है। ये नृत्य, नौटंकी, जादूगरी, करतब आदि करते हुए हमेशा घूमते रहते हैं। कंजारभाट समुदाय सन 1871 के ‘आपराधिक जनजाति अधिनियम’ का शिकार बना हुआ है।