प्रतीकात्मक तस्वीर
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मौसमी प्रवासी
कच्छ के रण में बेहद गर्मी, बारिश और बाढ़ के हालात एक खास इकोसिस्टम बनाते हैं जो कई तरह की वनस्पतियों और जीवों के लिए मुफीद है। अक्टूबर से मार्च के बीच ठंड के महीनों में प्रवासियों परिंदों के झुंड छोटे रण में अपना घर बनाते हैं। इन पक्षियों में चील, सारस, बगुले, तीतर, फुदकी और रण के सबसे मशहूर राजहंस शामिल हैं। छोटा रण विलुप्त होने के कगार तक पहुंच चुके एशियाई जंगली गधों की भी आखिरी शरणस्थली है। यहां रेगिस्तानी लोमड़ी, नीलगाय और चिंकारा भी मिलते हैं।