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ब्ल्यू इकनॉमी: आखिर क्या होती है नीली अर्थव्यवस्था? दुनियाभर के देशों में इसे लेकर मची है होड़

Sun, 07 Mar 2021 08:05 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ट्विटर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार बातें कर रहे हैं और इसके लिए कई आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं। इसी बीच उन्होंने देश को ब्ल्यू इकनॉमी में आगे बढ़ाने का विचार रखा है। प्रधानमंत्री मोदी का ऐसा मानना है कि आने वाले समय में वही देश विश्व में मजबूत बनेगा, जिसकी ब्ल्यू इकनॉमी विकसित होगी। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि ब्ल्यू इकनॉमी क्या होती है?
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ट्विटर
बता दें कि ब्ल्यू इकनॉमी शब्द बहुत पुराना नहीं है। आज से लगभग दशक भर पहले ही ये शब्द अस्तित्व में आया। समुद्र के जरिए व्यापार को बढ़ावा देना ही ब्ल्यू इकनॉमी कहलाता है। इस शब्द की खोज बेल्जियन व्यापारी और लेखक गुंटेर पॉली ने की थी। भले ही ये शब्द नया नहीं है, लेकिन इस शब्द के पीछे जो अर्थ है, वो सैकड़ों सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सदियों से व्यापारी समुद्र के जरिए एक देश से दूसरे देश जाकर व्यापार फैलाते रहे हैं। ये प्रक्रिया उस समय से जारी है, जब ना ही हवाई जहाज की व्यवस्था थी और ना ही सड़क मार्ग से दुनिया जुड़ी थी। ऐसे स्थिति में व्यापार का एकमात्र और सबसे बढ़िया साधन समुद्री रास्ता ही था। समुद्री रास्तों, नए बंदरगाहों और समुद्री सामरिक नीति के जरिए अर्थव्यवस्था को बढ़ाना ही ब्ल्यू इकनॉमी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ट्विटर
ब्ल्यू इकनॉमी के तहत सबसे पहले समुद्र आधारित बिजनेस मॉडल तैयार किया जाता है। इसके साथ ही संसाधनों को ठीक से इस्तेमाल करने और समुद्री कचरे से निपटने के डायनामिक मॉडल पर कम किया जाता है। फिलहाल पर्यावरण दुनिया में एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में ब्ल्यू इकोनॉमी को अपनाना इस नजरिये से भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बता दें कि हमारा देश भारत तीन ओर से सुमुद्र से घिरा हुआ है। ऐसे में ब्ल्यू इकनॉमी को विकसित कर देश की आर्थिक ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है। केवल भारत ही नहीं चीन समेत दुनिया के कई देश इस नए अर्थव्यवस्था पर काम कर रहे हैं।
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