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यहां रहते हैं केवल 27 लोग, टाइम पास करने के लिए करते हैं ये खास काम, देखें Video

Thu, 02 May 2019 02:31 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक ओर जहां दुनिया में कई देश तेजी से बढ़ रही आबादी को लेकर चिंतित हैं वहीं दुनिया में एक खास गांव है, जहां महज 27 लोग ही रहते हैं। इस अनोखे गांव में इतने कम लोग हैं कि यहां ज्यादातर इलाके खाली ही पड़े रहते हैं और लोगों को काफी अकेलापन महसूस होता है।
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- फोटो : npr.org
लेकिन इस अनोखे गांव के लोगों ने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए ऐसा तरीका खोज निकाला है जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां लोग अपना सूनापन दूर करने के लिए घरों के बाहर पुतले रखते हैं।
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- फोटो : npr.org
दरअसल, हम बात कर रहे हैं जापान की, जहां बीते कुछ सालों में जनसंख्या में काफी गिरावट आई है। शहरों से लेकर गांवों में, हर जगह आबादी कम होती जा रही है। जापान का एक गांव है जहां सिर्फ कुल 27 लोग ही रहते हैं। बता दें कि यह अजीबोगरीब गांव पश्चिमी जापान के शिकोकू टापू पर बसा है जिसका नाम नागोरो गांव है। यहां एक भी बच्चा नहीं है इसलिए यहां के लोगों ने क्लासरूप में भी बच्चों के पुलते बनाकर रखे हुए हैं। 

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- फोटो : npr.org
नागोरो गांव में रहने वाली 69 साल की सुकिमी आयनो नाम की महिला ने इंसान जितने बड़े पुतले बनाने की शुरूआत की। इनका कहना है कि इस गांव में सिर्फ 27 लोग रहते हैं, लेकिन यहां पुतलों की संख्या 270 है।
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- फोटो : npr.org
लगभग 16 साल पहले नागोरो गांव में पुतले बनाने की शुरुआत हुई थी। सुकिमी ने पहला पुतला बनाया और उसे अपने पिता के कपड़े पहना दिए। इन पुतलों को बनाने का मकसद था बगीचे के पौधों को बचाना। सुकिमी ने पुतला बनाकर बगीचे में रख दिया ताकि कोई पक्षी फसलों को खराब ना करें।
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Tsukimi Ayano - फोटो : npr.org
उन्होंने इन पुतलों को तैयार करने के बारे में बताते हुए कहा कि वो लकड़ी की डंडियों के इन्हें बनाती हैं और अखबार के कागज से शरीर को भरती हैं। इलास्टिक के स्किन बनाती हैं। फैब्रिक से स्किन बनाती हैं और ऊन से बाल बनाती हैं। इन पुतलों को इंसानों की तरह दिखाने के लिए वो गालों और होंठों को गुलाबी रंग से रंग देती हैं। 

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Nagoro village - फोटो : Unusual Places
ये पुतले हर गली के कोने और घरों के बाहर रखे जाते हैं। सुकिमी ने आगे बताया कि इस गांव में कोई बच्चा नही है। यहां सबसे छोटे आदमी की उम्र 55 साल है। इस गांव के लोग शहरों में पलायन कर गए। इस वजह से सिर्फ ये पुतले ही अकेलापन दूर करती हैं।
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- फोटो : Vikingess Voyages
सुकिमी ने कहा कि इन पुतलों (डॉल्स) की वजह से नागोरो गांव में टूरिस्ट्स आने लगे हैं। आशा करती हूं कि जल्द ही ये गांव फिर से असली इंसानों से भर जाएगा। इन पुतलों  की वजह से ही अब ये नागोरो गांव भरा-भरा सा लगता है और लोगों को यहां अकेलापन महसूस नहीं होता है। यहां पुतलों को देखने के लिए आने वाले टूरिस्ट्सों की वजह से फिलहाल थोड़ी चहल-पहल बनी रहती है। 

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