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ISRO: नासा और चीन को टक्कर देने की तैयारी में इसरो, बना रहा परमाणु रॉकेट

Fri, 21 Jul 2023 01:20 PM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Nuclear Engines Rockets - फोटो : istock
ISRO BARC Nuclear Engines Rockets: हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चंद्रयान-3 को लॉन्च कर दिया है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है। वहीं अब एक और कमाल की खबर सामने आई है। पीएसएलवी की शानदार सफलता के बाद इसरो ने अब नासा और चीन को टक्कर देते हुए मंगल तक का सफर तय करने की तैयारी शुरू कर दी है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले रॉकेट के लिए इंजन को बनाने के लिए इसरो ने देश की अग्रणी परमाणु एजेंसी भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के साथ हाथ मिलाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केमिकल से चलने वाले इंजन कुछ हद तक ही काम आते हैं, लेकिन अगर एक स्पेसक्राफ्ट को एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक की यात्रा करनी हो या अनंत अंतरिक्ष में भेजना हो तो परमाणु ऊर्जा से चलने वाले यान ही कारगर साबित होते हैं।

रिपोर्ट्स की मानें तो केमिकल से चलने वाले रॉकेट में अधिक ईंधन नहीं भरा जा सकता है, जिसकी वजह से वह अंतरिक्ष में लंबी दूरी तय नहीं कर पाता है।
 
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Nuclear Engines Rockets - फोटो : istock
वहीं सोलर पावर वाले यान की बात की जाए तो अंतरिक्ष में लंबी दूरी तक सूरज की रोशनी भी नहीं आती ऐसे में रॉकेट का चलना मुश्किल हो सकता। ऐसे में अब इसरो ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाले इंजन पर काम करना शुरू किया है। रिपोर्ट के मुताबिक बार्क के साथ मिलकर इसरो रेडियो थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर बना रहे हैं।
 
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Nuclear Engines Rockets - फोटो : istock
कैसे काम करेगा परमाणु रॉकेट?
परमाणु इंजन परमाणु विखंडन वाले रिएक्टर जैसे नहीं होते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है। दरअसल रेडियो थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर के अंदर प्लूटोनियम-238 या स्ट्रोंटियम-90 जैसे रेडियोएक्टिव मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। जब यह नष्ट होते हैं तो इससे गर्मी पैदा होती है। इस इंजन के दो हिस्से होते हैं, पहला- द रेडियो आइसोटोप हीटर यूनिट जो गर्मी पैदा करने के लिए जिम्मेदार होगा और दूसरा रेडियो थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर जो इस गर्मी को इलेक्ट्रिसिटी में बदलेगा।

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ISRO - फोटो : ISRO
इसके बाद यह गर्मी 'थर्मोकपल' में बदल जाएगी, जो वोल्टेज पैदा करता है। यह वोल्टेज बैटरी को चार्ज करने में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सैटेलाइट को जरूरी ताकत मिलती है।

 
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Nuclear Engines Rockets - फोटो : istock
नासा के स्पेसक्राफ्ट वोयागेर, कैसिनी और क्यूरिसिटी भी इसी तरह के इंजन द्वारा चलते हैं। वहीं नासा भी अब नए परमाणु थर्मल प्रपल्शन तकनीकों पर लगातार काम कर रहा है। इसकी मदद से सुदूर अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री बहुत तेजी से यात्रा कर सकेंगे।
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