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अंतरिक्ष की सैर करने वाले वो कुत्ते, जो धरती पर आते ही हो गए थे मशहूर

Wed, 26 Aug 2020 09:45 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अंतरिक्ष से धरती पर सुरक्षित लौटने वाले बेल्का और स्ट्रेइका नामक कुत्ते - फोटो : Social media
इंसानों और जानवरों के बीच प्यार के आपने कई किस्से सुने होंगे। आचार्य चाणक्य ने भी बताया है कि इंसान चाहे तो जानवरों से अच्छी सीख ले सकता है। इन जानवरों में कुत्तों को इंसानों का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है। इंसान की तरक्की में भी कुत्तों का बहुत योगदान रहा है। इस जानवर के प्रति प्यार और कृतज्ञता जाहिर करने के लिए हर साल 26 अगस्त को इंटरनेशनल डॉग डे मनाया जाता है। अगर हम आपको ये बताएं कि कुत्तों ने ही इंसान की अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगाने में मदद की, तो शायद आप यकीन न करें। तो चलिए आपको यकीन दिलाने के लिए पूरी कहानी सुनाते हैं।
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अंतरिक्ष से धरती पर सुरक्षित लौटने वाले बेल्का और स्ट्रेइका नामक कुत्ते - फोटो : Social media
किस्सा पचास और साठ के दशक का है। दूसरा विश्व युद्ध खत्म होते ही अमेरिका और सोवियत संघ में शीत युद्ध छिड़ गया था। अमेरिका ने पहले एटम बन बना लिया, तो सोवियत संघ अंतरिक्ष की रेस में अमेरिका को पछाड़ने में जुट गया। आज से करीब 62 साल पहले यानी तीन नवंबर, 1957 को सोवियत संघ ने स्पुतनिक 2 नाम का अंतरिक्षयान भेजा। असल में स्पुतनिक 1 की कामयाबी के बाद सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने अपने वैज्ञानिकों को एक महीने में एक कुत्ते को अंतरिक्षयान के साथ भेजने का निर्देश दिया था। इस हुक्म की तामील करने के चक्कर में वैज्ञानिकों ने ये सोचा ही नहीं कि इसकी वापसी कब होगी।
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अंतरिक्ष में जाने वाली पहली कुतिया लाइका - फोटो : Social media
लाइका नाम की इस कुतिया को जब स्पुतनिक पर सवार किया गया तो वैज्ञानिकों को पता था कि वो इसे आखिरी बार जिंदा देख रहे हैं। लंदन के साइस म्यूजियम के डग मिलार्ड कहते हैं कि लाइका के लिए अंतरिक्ष की ये उड़ान वन-वे थी। जब स्पुतनिक 2 अंतरिक्ष में पहुंच गया तो सोवियत संघ ने दुनिया को इसकी कामयाबी को बढ़ा-चढ़ाकर बताया। ये बताया गया कि लाइका ने अंतरिक्ष में एक हफ्ते मजे में बिताए। ये बात तो 2002 में सामने आई कि लाइका की तो अंतरिक्ष में पहुंचने के सात घंटे के भीतर ही घबराहट और गर्मी से मौत हो गई थी।

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V2 रॉकेट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
सोवियत संघ के लिए स्पुतनिक 2 मिशन इंटरनेशनल स्तर पर बड़ी कामयाबी थी। लाइका पूरे देश में हीरो बन गई। स्पुतनिक की कामयाबी से साबित हो गया था कि स्पेस रेस में सोवियत संघ अमेरिका से बहुत आगे निकल गया था। ये काफी भारी अंतरिक्षयान था। इससे संदेश ये गया कि सोवियत संघ एटमी हथियार से लैस रॉकेट से अमेरिका पर निशाना लगा सकता था।
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अंतरिक्ष में जाने वाली पहली कुतिया लाइका - फोटो : Social media
सोवियत संघ, अंतरिक्ष मिशन के शुरुआती दौर से ही कुत्तों को अंतरिक्ष के सफर पर भेजता रहा था, जब उनके हाथ जर्मन इंजीनियर वर्नहर वॉन ब्रॉन का फॉर्मूला लगा था। ब्रॉन के V2 रॉकेट की मदद से ये तजुर्बा किया जा रहा था। पहले तो धरती की कक्षा में यानी धरती का चक्कर लगाने के लिए यान भेजे जाते थे। ऐसे मिशन पर भेजे गए ज्यादातर जानवर जिंदा लौट आए थे।

उस दौर में अमेरिकी वैज्ञानिक अपने स्पेस मिशन के लिए बंदर और चिंपांजी का इस्तेमाल करते थे। वहीं सोवियत वैज्ञानिकों की पहली पसंद कुत्ते थे। मिशन के लिए सोवियत वैज्ञानिक अक्सर आवारा कुत्तों को पकड़ा करते थे। रात के वक्त सुनसान सड़कों पर कुत्तों की तलाश में वैज्ञानिक निकला करते थे। आवारा कुत्तों को अच्छा खाना-पीना और ट्रेनिंग देकर स्पेस मिशन के लिए तैयार किया जाता था। उन्हें अक्सर जोड़ों में अंतरिक्ष मिशन पर भेजा जाता था। इससे दो अलग-अलग जानवरों से मिले आंकड़ों की तुलना करने में मदद मिलती थी।
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अंतरिक्ष से धरती पर सुरक्षित लौटने वाले बेल्का और स्ट्रेइका नामक कुत्ते - फोटो : Social media
स्पुतनिक 2 के तीन साल बाद सोवियत संघ के कुत्तों ने अंतरिक्ष में एक और बड़ा कारनामा किया। 19 अगस्त 1960 को बेल्का और स्ट्रेइका नाम के दो कुत्ते, दो चूहों, एक खरगोश और कुछ मधुमक्खियों के साथ अंतरिक्ष की सैर को गए। सबको स्पेससूट पहनाकर भेजा गया था। आंकड़े बताते हैं कि कक्षा में पहुंचने के बाद दोनों शांत बैठे थे, लेकिन चौथे चक्कर के दौरान बेल्का को उल्टी आने लगी, इस शोर की वजह से स्ट्रेइका भी चौकन्ना हो गया। हालांकि अंतरिक्षयान के अंदर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दोनों ही कुत्ते ज्यादा तनाव में नहीं दिखाई दिए।

अंतरिक्ष में धरती के 17 चक्कर लगाने के बाद वैज्ञानिकों ने स्पेसक्राफ्ट को वापस धरती पर आने का आदेश दिया। धरती पर वापसी के बाद बेल्का और स्ट्रेइका दोनों ही खुशमिजाज दिखे। इसके बाद तो सोवियत संघ के ये स्पेस रिटर्न कुत्ते दुनिया भर में मशहूर हो गए। ये कई टीवी शो में भी शामिल हुए। दूसरे देशों में भी इनके नाम पर डाक टिकट और पोस्टर छापे गए।
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अंतरिक्ष से धरती पर सुरक्षित लौटने वाले बेल्का और स्ट्रेइका नामक कुत्ते - फोटो : Social media
जून 1961 में जब सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव और अमरीकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी के बीच वियना में शिखर वार्ता हुई, इस दौरान दोनों नेताओं के बीच माहौल बेहद ठंडा था। इसे हल्का करने के लिए कैनेडी की पत्नी जैकी ने ख्रुश्चेव से कहा कि वो अंतरिक्ष से लौटी स्ट्रेइका के बच्चों से में कुछ को उन्हें दे दें। ख्रुश्चेव ने स्ट्रेइका के बच्चे पुशिन्का को अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी को तोहफे के तौर पर भेजा। इसकी सख्ती से जांच करने के बाद पुशिन्का को व्हाइट हाउस में रखा गया। हालांकि जॉन कैनेडी को कुत्ते पसंद नहीं थे। मगर उनकी पत्नी और बच्चे अक्सर पुशिन्का और दूसरे कुत्तों के साथ खेलते थे। पुशिन्का और व्हाइट हाउस के कुत्ते चार्ली के मेल से कुछ बच्चे भी हुए।

जानकार कहते हैं कि पुशिन्का को तोहफे के तौर पर देने की वजह से सोवियत संघ और अमेरिका के बीच तनातनी भी कम हुई। कुछ लोग तो ये कहते हैं कि क्यूबा के मिसाइल संकट के दौरान ख्रुश्चेव और कैनेडी के बीच बातचीत का माहौल भी पुशिन्का की वजह से बना। पुशिन्का के दो बच्चे अमेरिकी बच्चों को दान में दिए गए थे। 1963 में कैनेडी की हत्या के बाद पुशिन्का को व्हाइट हाउस के माली को दान में दे दिया गया था। उसके बाद सोवियत नस्ल के इस कुत्ते की आने वाली पीढ़ियों का क्या हुआ, कुछ पता नहीं।
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अंतरिक्ष की सैर करने वाले कुत्ते - फोटो : Social media
सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में कुत्तों वाली उड़ान की कामयाबी के बाद कुत्तों को अंतरिक्ष भेजना बंद कर दिया था। ब्रिटेन के डग मिलार्ड कहते हैं कि इन कुत्तों को दुनिया को हीरो के तौर पर याद रखना चाहिए। मिलार्ड मानते हैं कि दुनिया इन्हें उस तरह से सम्मान नहीं देती, जिसके वो हकदार हैं। आखिर सितारों की तरफ इंसान के कदम कुत्तों, बंदरों और चिंपैंजियों की मदद से ही तो बढ़े थे।
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