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आखिर भगवान कृष्ण ने अपने ही पुत्र को क्यों दिया था कोढ़ी होने का श्राप? बड़ी रोचक है कहानी

Mon, 24 Aug 2020 07:43 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
भारत समेत दुनियाभर के लोगों का हिंदू पुराणों से गहरा रिश्ता है। हिंदू पुराणों में विष्णु के विभिन्न अवतारों के साथ-साथ 33 करोड़ देवी-देवताओं का विस्तृत वर्णन है। इन सभी देवी-देवताओं से जुड़ी ऐसी कई रहस्यमय कहानियां हैं, जिनके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। कुछ ऐसी है रहस्यमय कहानी है भगवान कृष्ण और उनके पुत्र से जुड़ा, जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने गुस्से में अपने ही पुत्र सांबा को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया था। आज हम आपको इस रोचक कहानी के बारे में बताएंगे।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
वैसे तो श्रीकृष्ण की कई रानियां थीं, जिनमें से एक जामवंत की पुत्री जामवंती भी थी। श्रीकृष्ण और जामवंती के विवाह के पीछे भी एक कहानी है। पुराणों के अनुसार, बहुमूल्य मणि हासिल करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत में 28 दिनों तक युद्ध चला था। युद्ध के दौरान जब जामवंत ने कृष्ण के असली रूप को पहचान लिया, तो उन्होंने मणि समेत अपनी पुत्री जामवंती का हाथ भी उन्हें सौंप दिया।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
कृष्ण और जामवंती के पुत्र का नाम ही सांबा था। कहते हैं कि सांबा इतना सुंदर और आकर्षक था कि कृष्ण की कई पटरानियां भी उसकी सुंदरता के प्रभाव में आ गई थीं। कहते हैं कि सांबा के रूप से प्रभावित होकर एक दिन श्रीकृष्ण की एक रानी ने सांबा की पत्नी का रूप धारण कर उसे आलिंगन में भर लिया, लेकिन ऐसा करते हुए श्रीकृष्ण ने उन दोनों को देख लिया। इसी बात से गुस्सा होकर श्रीकृष्ण ने सांबा को कोढ़ी हो जाने का श्राप दे दिया।

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भगवान सूर्य - फोटो : सोशल मीडिया
पुराणों के अनुसार, महर्षि कटक ने सांबा को कोढ़ से मुक्ति का उपाय बताते हुए सूर्य देव की उपासना करने को कहा। उसके बाद सांबा ने चंद्रभागा नदी के किनारे मित्रवन में सूर्य देव का एक मंदिर बनवाया और 12 सालों तक सूर्य देव की कड़ी तपस्या की।
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चंद्रभागा नदी - फोटो : सोशल मीडिया
कहते हैं कि सूर्य देव ने सांबा की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे कोढ़ से मुक्ति पाने के लिए चंद्रभागा नदी में स्नान करने को कहा। आज भी चंद्रभागा नदी को कोढ़ ठीक करने वाली नदी के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इस नदी में स्नान करने वाले व्यक्ति का कोढ़ जल्दी ठीक हो जाता है।
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