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अजब गजब: ये है दुनिया का सबसे अनोखा बॉर्डर, घरों के भीतर से होकर गुजरती है सीमा रेखा

Fri, 04 Jun 2021 11:23 AM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बार्ले बॉर्डर - फोटो : Social media
सीमा रेखा को लेकर अक्सर पड़ोसी देशों के बीच तनातनी देखी जाती है। कई बार सीमा विवाद को लेकर हालात इतने खराब हो जाते हैं कि व्यापक पैमाने पर दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ जाता है और कई सारे बेकसूर लोगों की जानें जाती हैं। इसके चलते दोनों देशों को अरबों रुपयों का घाटा सहना पड़ता है और अर्थव्यवस्था के हालात भी काफी बिगड़ जाते हैं। इसी वजह से दुनिया भर में कई देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कटीले तारों से फेंसिंग करते हैं। वहीं दूसरी तरफ यूरोप में एक ऐसा बॉर्डर भी है, जहां आप एक देश मे नाश्ता बना सकते हो तो दूसरे देश में जाकर उसको खा सकते हैं। ये बॉर्डर बार्ले में स्थित है। बार्ले शहर दो देशों की सीमाओं के बीच बसा है। यह शहर नीदरलैंड और बेल्जियम की सीमा पर स्थित है। अगर आप इस देश में स्थित हैं तो आपका एक कदम नीदरलैंड में हो सकता है तो दूसरा कदम बेल्जियम में। यहां स्थित कई सारे सामुदायिक भवन और कैफे हाउस का आधा हिस्सा नीदरलैंड में है तो आधा भाग बेल्जियम में। 

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बार्ले बॉर्डर - फोटो : Social media
बार्ले शहर का कुछ भाग नीदरलैंड के पास है और कुछ हिस्सा बेल्जियम के पास। इस शहर का जो भाग नीदरलैंड के पास है उसे बार्ले नासायु के नाम से जाना जाता है। शहर का जो हिस्सा बेल्जियम में है उसे बार्ले हेरटोग कहा जाता है। दोनों देशों के बीच की इस सीमा रेखा को एक सफेद क्रॉस बनाकर चिह्नित किया गया है। 
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बार्ले बॉर्डर - फोटो : Social media
कई जगहों पर दोनों देशों के बीच की यह सीमा रेखा लोगों के घरों के भीतर से होकर गुजरती है। घर के भीतर अगर बेड सीमा रेखा के ऊपर रखा हुआ है, तो सोते वक्त यहां के लोग करवट बदलते ही नीदरलैंड पहुंच जाते हैं तो दूसरी करवट में वापिस बेल्जियम आ जाते हैं। अगर इस शहर के इतिहास की बात करें तो स्थानीय पर्यटन कार्यालय के प्रमुख विलियम वैन गूल बताते हैं कि ब्राबांट के ड्यूक हेनरी प्रथम ने 1198 में इस क्षेत्र को ब्रेडा के शासक को पट्टे पर दिया था। गौरतलब बात ये है कि उस दौरान यह जमीन उपजाऊ नहीं थी।

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बार्ले बॉर्डर - फोटो : Social media
कई सालों बाद 1830 में जब नीदरलैंड से अलग होकर बेल्जियम एक नया देश बना तो सीमाओं का निर्धारण शुरू हुआ। उस वक्त सर्वेक्षकों ने उत्तरी सागर के तट से जर्मन राज्यों को निर्धारित किया। वहीं जब सर्वेक्षक इस इलाके में पहुंचे तो यहां की सीमा को निर्धारित करने का फैसला बाद में लेने के लिए कहा। बाद में जब सीमा का निर्धारण किया जाने लगा तो उस वक्त शहर में कई सारे घर, दुकानें, पार्क आदि बंटे हुए थे। स्थायी संघर्ष ना हो इसलिए यह फैसला लिया गया कि एक सीमा रेखा खींची जाएगी और उस सीमा रेखा पर स्थित घर का द्वार जिस देश की सीमा में खुलेगा उसे उसी देश की नागरिकता दी जाएगी।
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बार्ले बॉर्डर - फोटो : Social media
आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन इस शहर में हर चीज दो हैं। इस शहर के दो नाम हैं, नगर पालिका दो हैं, डाकघर दो हैं लेकिन इन सब को नियंत्रित एक ही समिति करती है। अपने इसी अनोखेपन के चलते ये शहर अक्सर सुर्खियों में बना रहता है और देश-दुनिया से कई सारे पर्यटक इसे देखने आते हैं। वे लोग दोनों देशों की सीमा पर खड़े होकर अपनी तस्वीरें भी खिंचवाते हैं।
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