पामेला माउंटबेटन
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पामेला की ऊंची हील की सैंडिल
माउंटबेटन की 17 वर्षीय बेटी पामेला भी दो लोगों के साथ उस समारोह को देखने पहुंचीं थीं। नेहरू ने पामेला को देखा और चिल्ला कर कहा लोगों के ऊपर से फांदती हुई मंच पर आ जाओ। पामेला भी चिल्लाई, 'मैं ऐसा कैसे कर सकती हूं। मैंने ऊंची एड़ी की सैंडल पहनी हुई है।' नेहरू ने कहा सैंडल को हाथ में ले लो। पामेला इतने ऐतिहासिक मौके पर ये सब करने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती थीं।
अपनी किताब 'इंडिया रिमेंबर्ड' में पामेला लिखती हैं, 'मैंने अपने हाथ खड़े कर दिए। मैं सैंडल नहीं उतार सकती थी। नेहरू ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा तुम सैंडल पहने-पहने ही लोगों के सिर के ऊपर पैर रखते हुए आगे बढ़ो। वो विल्कुल भी बुरा नहीं मानेंगे। मैंने कहा मेरी हील उन्हें चुभेगी। नेहरू फिर बोले बेवकूफ लड़की सैंडल को हाथ में लो और आगे बढ़ो।'
पहले नेहरू लोगों के सिरों पर पैर रखते हुए मंच पर पहुंचे और फिर उनकी देखा देखी भारत के अंतिम वॉयसराय की लड़की ने भी अपने सेंडिल को उतार कर हाथों में लिया और इंसानों के सिरों की कालीन पर पैर रखते हुए मंच तक पहुंच गईं, जहां सरदार पटेल की बेटी मणिबेन पटेल पहले से मौजूद थीं।
डोमिनीक लापिएर और लैरी कॉलिंस इपनी किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में लिखते हैं, 'मंच के चारों ओर उमड़ते हुए इंसानों के उस सैलाब में हजारों ऐसी औरतें भी थीं जो अपने दूध पीते बच्चों को सीने से लगाए हुए थीं। इस डर से कि कहीं उनके बच्चे बढ़ती हुई भीड़ में पिस न जाएं, जान पर खेल कर वो उन्हें रबड़ की गेंद की तरह हवा में उछाल देतीं और जब वो नीचे गिरने लगते तो उन्हें फिर उछाल देतीं। एक क्षण में हवा में इस तरह सैकड़ों बच्चे उछाल दिए गए। पामेला माउंटबेटन की आखें आश्चर्य से फटी रह गईं और वो सोचने लगीं, 'हे भगवान, यहां तो बच्चों की बरसात हो रही है।''