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भारत के इस मंदिर में थी अद्भुत शक्ति, बड़े से बड़े जहाज को खींच लेती थी अपनी तरफ

Tue, 19 Nov 2019 09:39 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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konark sun temple - फोटो : social media
भारत रहस्यों से भरा हुआ है। कदम-कदम पर ऐसी जानकारियां सामने आती हैं जिन्हें जानने के बाद भी यकीन नहीं होता है। हिंदुस्तान का इतिहास इसी तरह की कई जानकारियां अपने दामन में समेंटे हुए हैं। ऐसे ही कुछ रोचक तथ्यों को हम आपके सामने पेश करते हैं। इसी कड़ी में हम आज आपको मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां 52 टन का चुंबक लगा हुआ है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से...
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Konark Temple - फोटो : Youtube
यह मंदिर है कोणार्क का सूर्य मंदिर। वैसे तो कोणार्क मंदिर अपनी पौराणिकता और आस्था के लिए विश्व भर में मशहूर है। लेकिन कई अन्य कारण भी है जिसकी वजह से इस मंदिर को देखने के लिए दुनिया के कोने कोने से लोग यहां आते हैं।
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Konark Temple - फोटो : Youtube
कोर्णाक मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए गए सूर्य भगवान के साक्षात दर्शन करने का सौभाग्य कम ही लोग को मिल पाता है। भारत के इस ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जा चुका है। कहते हैं कि इस मंदिर में 52 टन का विशालकाय चुंबक लगा हुआ था।

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Konark Temple - फोटो : Youtube
पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य मंदिर के शिखर पर 52 टन का चुंबकीय पत्थर लगा हुआ था। यह पत्थर समुद्र की कठिनाइओं को कम करता था। जिसकी बदौलत मंदिर समुद्र के किनारे सैकड़ों दशकों से खड़ा हुआ है। एक समय ऐसा भी था जब मंदिर का मुख्य चुंबक, अन्य चुंबकों के साथ इस तरह की व्यवस्था से सजाया हुआ था। कि मंदिर की मूर्ति हवा में तैरती हुई नजर आती थी।
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Konark Temple - फोटो : Youtube
लेकिन मंदिर की ये ताकतवर चुंबकीय व्यवस्था आधुनिक काल की शुरुआत में समस्या बनने लगी। चुंबकीय शक्ति इतनी तेज थी कि पानी के जहाज मंदिर की तरफ खींचे चले आते थे। अंग्रेजों के काल में जब उन्हें नुकसान होने लगा तो उन्होंने मंदिर के अंदर लगे इस चुंबक को निकाल दिया। लेकिन इससे जो हुआ, उसका किसी को अनुमान नहीं था।
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Konark Temple - फोटो : Youtube
पूरे मंदिर को चुंबकीय व्यवस्था के हिसाब से बनाया गया था। विशालकाय चुंबक को निकालने की वजह से मंदिर का संतुलन बिगड़ गया। जिसकी वजह से मंदिर की कई दीवारें और पत्थर गिरने लगे।
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Konark Temple - फोटो : Youtube
भारत के पूर्वी राज्य ओडीशा के पुरी जिले में स्थित यह मंदिर चंद्रभागा नदी के किनारे बना है। इसे सूर्य मंदिर भी कहा जाता है। अद्भुत कला का नमूना यह मंदिर तरह से अनूठा है। इस मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। रथ में 12 जोड़े पहिये लगे हुए हैं। जिनकी विशाल रचना आपको रोमांचित कर देगी।
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