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ज्ञान की बात: आखिर सौरमंडल के इस ग्रह को क्यों कहा जाता है वैक्यूम क्लीनर?

Mon, 17 May 2021 10:58 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
सौरमंडल में कुल 8 ग्रह हैं, लेकिन इन्हें जितना भी समझने की कोशिश की जाए, तो उतना ही उलझना पड़ता है। क्योंकि सभी ग्रह कुछ खास वजहों से एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। बृहस्पति ग्रह का नाम तो आपने सुना ही होगा। इस ग्रह को हमारे देश भारत में 'गुरु' के नाम से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इस ग्रह को 'जुपिटर' के नाम से जाना जाता है। बता दें कि जुपिटर रोमन सभ्यता के एक पौराणिक देवता का नाम है। आज हम आपको इस ग्रह से जुड़ी कई रोचक बाते बताएंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बृहस्पति ग्रह पर कोई धरातल नहीं है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन से बना हुआ है और हमेशा अमोनिया क्रिस्टल और संभवतः अमोनियम हाइड्रोसल्फाइड के बादलों से ढंका हुआ रहता है। ऐसे में इस ग्रह पर जीवन की कोई संभावना नहीं है।
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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
'द ग्रेट रेड स्पॉट' बृहस्पति ग्रह की सबसे रोचक और रहस्यमय चीज है। दरअसल, ये एक तरह का तुफान है, जो लाल धब्बे की तरह दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ग्रह पर सैकड़ों सालों से एक तूफान लगातार चल रहा है और यह इतना बड़ा है कि उसमें आराम से पृथ्वी जैसे तीन ग्रह समा जाएं। हालांकि, वैज्ञानिकों के पास इस बात का जवाब नहीं है कि यह तूफान कैसे और क्यों चल रहा है?

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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
बृहस्पति ग्रह को सौरमंडल का 'वैक्यूम क्लीनर' भी कहा जाता है। दरअसल, इसका अपना एक शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल है, जिसकी मदद से वह सौरमंडल में आने वाले बाहरी उल्कापिंडों को अपनी ओर खींच लेता है। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद वो उल्कापिंड पृथ्वी या अन्य ग्रहों से भी टकरा जाते, जिससे भारी तबाही होती।
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सौरमंडल के ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
पृथ्वी पर तो एक दिन में कुल 24 घंटे होते हैं, लेकिन बृहस्पति ग्रह पर एक दिन मात्र नौ घंटा और 55 मिनट का ही होता है। इतना ही नहीं पृथ्वी के 11.9 साल में बृहस्पति ग्रह का मात्र एक साल होता है, जो बेहद ही हैरान करने वाली बात है।
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