जब ट्रेन से उतरकर नाव पकड़नी पड़ती थी
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जब ट्रेन से उतरकर नाव पकड़नी पड़ती थी
इस कहानी का सबसे रोचक पहलू यह है कि उस समय गंगा पर कोई पुल नहीं था। नतीजतन, ट्रेन तारी घाट पर आकर रुक जाती थी। इसके बाद यात्रियों को अपना सामान लेकर नदी किनारे जाना पड़ता और फिर नाव के जरिए गंगा पार करनी होती थी।
बरसात के दिनों में, जब नदी उफान पर होती थी, यह सफर और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। कई यात्रियों के लिए यह अनुभव रोमांच से भरा होता था, तो कुछ के लिए मुश्किल भरा।