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Ajab Gajab: भारत के इस स्टेशन पर खत्म हो जाती थीं पटरियां, फिर ट्रेन नहीं नाव पूरी करती थी यात्रा

Fri, 17 Apr 2026 03:01 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Indian Railways Interesting Facts: क्या आपने कभी ऐसे स्टेशन के बारे में सुना है, जहां ट्रेन की पटरियां ही खत्म हो जाएं और आगे का सफर आपको खुद तय करना पड़े? आइए आज हम आपको एक अनोखे स्टेशन की अनोखी कहानी सुनाते हैं।
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स्टेशन जहां खत्म हो जाती थीं पटरियां - फोटो : AI
भारत का रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े और व्यस्त सिस्टम में गिना जाता है। हर दिन लाखों-करोड़ों लोग ट्रेनों के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं, कोई काम के सिलसिले में, तो कोई अपनों से मिलने। आमतौर पर ट्रेन यात्रा का मतलब होता है एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक बिना रुकावट पहुंचना। लेकिन जरा सोचिए, अगर किसी स्टेशन पर ट्रेन की पटरियां ही खत्म हो जाएं और आगे का सफर आपको खुद तय करना पड़े!

यह सुनने में अजीब जरूर लग रहा है, लेकिन कभी भारत में एक ऐसा स्टेशन मौजूद था, जहां ट्रेन आगे नहीं जाती थी। यात्रियों को बीच में उतरकर अपना सामान उठाना पड़ता था और फिर नाव के सहारे नदी पार करके अपनी यात्रा पूरी करनी होती थी।

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एक अनोखे स्टेशन की अनोखी कहानी - फोटो : AI
एक अनोखे स्टेशन की अनोखी कहानी
यह दिलचस्प किस्सा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित तारी घाट रेलवे स्टेशन का है। 19वीं सदी के आसपास, जब देश पर ब्रिटिश शासन था, तब इस स्टेशन की शुरुआत हुई। उस दौर में गाजीपुर अपनी अफीम फैक्ट्री के लिए प्रसिद्ध था और यहां से तैयार माल को विदेशों तक भेजा जाता था।

तारी घाट को इस व्यापार के लिए एक अहम केंद्र बनाया गया। यहां तक माल ट्रेन से पहुंचता था, लेकिन आगे की यात्रा गंगा नदी के रास्ते पूरी की जाती थी। इस तरह रेल और जल मार्ग का यह अनोखा संगम उस समय की खास पहचान बन गया था।
 
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जब ट्रेन से उतरकर नाव पकड़नी पड़ती थी - फोटो : adobestock
जब ट्रेन से उतरकर नाव पकड़नी पड़ती थी
इस कहानी का सबसे रोचक पहलू यह है कि उस समय गंगा पर कोई पुल नहीं था। नतीजतन, ट्रेन तारी घाट पर आकर रुक जाती थी। इसके बाद यात्रियों को अपना सामान लेकर नदी किनारे जाना पड़ता और फिर नाव के जरिए गंगा पार करनी होती थी।

बरसात के दिनों में, जब नदी उफान पर होती थी, यह सफर और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। कई यात्रियों के लिए यह अनुभव रोमांच से भरा होता था, तो कुछ के लिए मुश्किल भरा।
 

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कभी यहां बसती थी रौनक - फोटो : Adobe Stock
कभी यहां बसती थी रौनक
आज भले ही यह स्टेशन शांत नजर आता हो, लेकिन एक समय था जब यहां खूब चहल-पहल रहती थी। चाय की दुकानों की महक, यात्रियों की आवाजाही और नाव का इंतजार यह सब मिलकर एक अलग ही माहौल बनाते थे।

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समय के साथ सफर आसान हुआ - फोटो : Adobe Stock
समय के साथ सफर आसान हुआ
तकनीक और विकास के साथ हालात भी बदले। साल 2024 में गंगा पर एक आधुनिक रेल-कम-रोड पुल बन गया, जिससे गाजीपुर का सीधा संपर्क जुड़ गया। अब यात्रियों को बीच में उतरने या नाव का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
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