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Saraswati River: प्रयागराज संगम पर मिल गई सरस्वती नदी? वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

Tue, 12 May 2026 07:16 PM IST
Dharmendra Kumar Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Saraswati River: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम है। अब वैज्ञानिकों ने यहां जमीन के नीचे एक प्राचीन नदी खोजी है। अब सवाल है कि क्या प्रयागराज में वही सरस्वती नदी है, जो विलुप्त हो चुकी है?
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प्रयागराज संगम पर मिल गई सरस्वती नदी? - फोटो : Adobe Stock
Saraswati River: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम होता है। यहां पर सरस्वती नदी अदृश्य है। लेकिन वैज्ञानिकों को अब एक पुख्ता सबूत मिला है कि यहां पर सरस्वती नदी है। हैदराबाद के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट (NGRI) के शोधकर्ताओं ने एडवांस तकनीक से पता लगाया है कि गंगा और यमुना के बीच जमीन के भीतर एक विशाल प्राचीन नदी (पेलियो रिवर) बहती थी।

वैज्ञानिकों के इस खोज से संगम की पौराणिक कहानी को वैज्ञानिक आधार मिल रहा है। इस नदी का आकार गंगा और यमुना की तरह है। अब सवाल है कि क्या यह सरस्वती नदी है जिसके बारे में कहा जाता है कि प्राचीन काल में वह लुप्त हो गई थी। वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए एयरबोर्न जियोफिजिकल तकनीक (हेलीकॉप्टर से सर्वे) और कन्फर्मेटरी ड्रिलिंग (बोरिंग) का इस्तेमाल किया है। CSIR में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि यह खोज पूरी तरह पुष्ट है औरड्रिलिंग कर भौतिक प्रमाण हासिल किए गए हैं। 
 
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प्रयागराज संगम पर मिल गई सरस्वती नदी? - फोटो : CSIR-NGRI
प्राचीन नदी कैसी है? 
 
प्रयागराज संगम पर जमीन के नीचे दबी नदी (पेलियो चैनल) 4 से 5 किलोमीटर चौड़ा है। यह गंगा और यमुना जितना बड़ा है।  दोनों नदियों के समान इसकी गहराई और आधार स्तर है। इससे साबित होता है कि यह एक अलग नदी थी। यह गंगा या यमुना का पुराना रास्ता नहीं है। वैज्ञानिकों ने नदी में घुमावदार पैटर्न भी मिला है। इससे पता चला है कि यह गंगा-यमुना के साथ-साथ बहती थी। 
 
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प्रयागराज संगम पर मिल गई सरस्वती नदी? - फोटो : @महाकुंभ
पहले वैज्ञानिकों ने नदी 45 किमी लंबाई खोजी, जिसके बाद उन्होंने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की मदद से इस कानपुर तक बढ़ा दिया और 200 किमी कर दिया। वैज्ञानिकों को संदेह जताया है कि यह नदी पश्चिम की तरफ हिमालय की तरफ भी फैली हो सकती है। वैज्ञानिकों ने प्रयागराज संगम से करीब 25 किलोमीटर पहले इसकी साफ पहचान की है। वैज्ञानिक का कहना है कि प्रयागराज शहर के भीतर घनी आबादी, बिजली के तार और इमारतों की वजह से सर्वे नहीं किया जा सका, क्योंकि हेली-बोर्न सर्वे में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सेंसर का इस्तेमाल होता है और यह सेंसर घने आबादी वाले इलाकों में काम नहीं करते।

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प्रयागराज संगम पर मिल गई सरस्वती नदी? - फोटो : PTI
भूजल स्तर बढ़ाने में मिल सकती है मदद 

प्रयागराज संगम के नीचे दबी नदी एक आपस में जुड़े हुए एक्वीफर सिस्टम का भाग है, जो गंगा और यमुना से जुड़ा हुआ है। इस सिस्टम से क्षेत्र में भूल जल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस प्राचीन नदी चैनल को रिचार्ज करके बारिश का पानी और सतही पानी को भूमिगत कर सकते हैं। उनका कहना है कि इससे गर्मी में नदियों में पानी बढ़ेगा और भूजल की गुणवत्ता भी ठीक होगी। यह खोज बेहद अहम है। हालांकि, इस नदी की जगह और आकार पौराणिक सरस्वती नदी के वर्णन से काफी मिलता है। 

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प्रयागराज संगम पर मिल गई सरस्वती नदी? - फोटो : adobe Stock
यह नदी  गंगा और यमुना की तरह बड़ी है और संगम के पास स्थित है, जिसकी वजह से यह खोज बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पेलियो चैनल मिले हैं, लेकिन इतना बड़ा, निरंतर और संगम के करीब यह पहली बार खोजा गया है।  वैज्ञानिकों ने कहा है कि डेटा, ड्रिलिंग और खोज से संगम की पूरी कहानी का अब धीरे-धीरे पता चल रहा है। 
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