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Uttarakhand Disaster: जानिए क्या होते हैं ग्लेशियर और क्यों टूटते हैं?

Mon, 08 Feb 2021 06:38 PM IST
योगेश जोशी फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से भारी तबाही हुई है। लगभग सात साल बाद उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत का कहर टूटा है। चमोली के रेणी गांव के पास में ग्लेशियर टूटा, जिसमें 150 से अधिक लोग बह गए। जिस समय ग्लेशियर टूटा ये सभी लोग ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट में काम कर थे। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे ग्लेशियर क्या होते हैं क्यों टूटते हैं। धौली गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने से कई पुल भी टूट गए हैं और कई गांवों से संपर्क भी टूट गया है। अगली स्लाइड्स में जानिए ग्लेशियर क्या होते हैं और क्यों टूटते हैं...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
  • ग्लेशियर क्या होते हैं
पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर सालों तक भारी मात्रा में एक ही जगह बर्फ जमने से ग्लेशियर बनता है। दो तरह के ग्लेशिर होते हैं-
  • अल्पाइन 
  • आइस शीट्स 
पहाड़ों के ग्लेशियर को अल्पाइन श्रेणी में रखा जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Twitter
  • ग्लेशियर क्यों टूटते हैं
ग्लेशियर टूटने के कई कारण होते हैं, जैसे-
  • गुरुत्वाकर्षण बल, गुरुत्वाकर्षण बल ग्लेशियर टूटने का प्रमुख कारण होता है।
  • ग्लेशिय के किनारों पर टेंशन।
  • ग्लोबल वॅार्मिंग- ग्लोबल वॅार्मिंग की वजह से ग्लेशियर की बर्फ तेजी से पिघलने लगती है, जिस वजह से ग्लेशियर टूटने लगता है। जब ग्लेशियर का कोई टूकड़ा टूटता है तो उसे काल्विंग कहा जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
ग्लेशियर के टूटने बाद उसके भीतर ड्रेनेज ब्लॉक में मौजूद पानी अपना रास्ता ढूंढ लेता है और जब यह ग्लेशियर के बीच से बहता है तो बर्फ भी तेजी से पिघलने लगती है। इस वजह से रास्ता काफी बड़ा हो जाता है और पानी का सैलाब आ जाता है। पानी का सैलाब आने से नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है जिस वजह से आसपास के इलाकों में काफी नुकसान हो जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि छोटे- मोटे ग्लेशियर अक्सर टूटते रहते हैं, लेकिन बड़ा ग्लेशियर दो या तीन साल के अंतराल में ही टूटता है। जिसका पहले से अनुमान लगा पाना भी संभव नहीं होता है।
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