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Asteroid News: पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड, वैज्ञानिक रख रहे हैं नजर

Wed, 02 Jul 2025 02:10 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Asteroid News: वैज्ञानिकों के मुताबिक, हमारे सौर मंडल का लगभग 4.6 अरब साल पहले निर्माण हुआ था। उस दौरान कुछ चट्टानी पिंड बच गए थे, जिन्हें एस्टेरॉयड कहा जाता है। अभी तक दस लाख से अधिक एस्टेरॉयड्स की पहचान की जा चुकी है।
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पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड - फोटो : Freepik
Asteroid News: पृथ्वी के लिए एस्टेरॉयड को खतरा माना जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर एस्टेरॉयड धरती से टकराता है, तो बड़ी तबाही मच सकती है। बताया जाता है कि धरती का चक्कर लगाने वाला बड़ा एस्टेरॉयड यानी क्षुद्रग्रह सिर्फ एक बार पृथ्वी से टकराया था जिसके बाद डायनासोर दुनिया से खत्म हो गए थे। इसके बाद कई बार पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एस्टेरॉयड के टकराने की बात कही गई, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। दुनियाभर में कई संगठन और वेधशालाएं हैं, जो इन पर नजर रखती हैं।

क्या हैं एस्टेरॉयड? 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, हमारे सौर मंडल का लगभग 4.6 अरब साल पहले निर्माण हुआ था। उस दौरान कुछ चट्टानी पिंड बच गए थे, जिन्हें एस्टेरॉयड कहा जाता है। अभी तक दस लाख से अधिक एस्टेरॉयड्स की पहचान की जा चुकी है। इनमें से अधिकतर मुख्य एस्टेरॉयड बेल्ट में स्थित हैं। यह बेल्ट मंगल और बृहस्पति के बीच का क्षेत्र है। 
 
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पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड - फोटो : Adobe Stock
सभी एस्टेरॉयड सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इनमें से कुछ पृथ्वी के पास से गुजरते हैं। अधिकतर एस्टेरॉयड बिना कोई नुकसान नहीं पहुंचाए गुजर जाते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे हैं जिन पर नजर रखना जरूरी है। इसलिए इन पर नजर रखी जाती है कि कहीं इनके पृथ्वी से टकराने की संभावना तो नहीं है। अगर है तो उसका संभावित समय क्या हो सकता है? वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रमुख एस्टेरॉयड्स पर नजर रखी जा रही है। उनमें कुछ के बारे में आज हम आपको अपनी खबर में बताएंगे। 
 
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पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड - फोटो : Freepik
एपोफिस एस्टेरॉयड

एपोफिस एस्टेरॉयड को पृथ्वी के लिए खतरा माना जाता है, क्योंकि इस टकराने की संभावना है। साल 2004 में इसकी खोज की गई थी। मिस्र की पौराणिक कथाओं में एपोफिस को विनाश का देवता माना जाता है, जिसके नाम पर एस्टेरॉयड का नाम रखा गया है। शुरुआत के दिनों में आशंकी थी कि एपोफिस पृथ्वी से टकरा सकता है, लेकिन बाद में नासा ने साफ किया आने वाले 100 वर्षों तक एपोफिस के पृथ्वी से टकराने का कोई खतरा नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह 13 अप्रैल 2029 को पृथ्वी के पास से सुरक्षित रूप से गुजरेगा। इसका औसत व्यास करीब 340 मीटर है यानी यह तीन फुटबॉल मैदानों के बराबर। यह पृथ्वी की सतह से करीब 32,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। यह बेहद नजदीक होगा, जिसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है। 

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पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड - फोटो : Freepik
एस्टेरॉयड 2024 वाईआर4

अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अनुमान है कि एस्टेरॉयड 2024 वाईआर-4 का आकार करीब 53 से 67 मीटर के बीच है। साल 2024 में इसकी खोज हुई थी। 2032 में पृथ्वी से टकराने की थोड़ी आशंका होने के बाद यह चर्चा में आया था। कुछ शोधकर्ताओं का शुरुआती गणनाओं में अनुमान था कि 2024 वाईआर-4 की पृथ्वी से टकराने की आशंका 32 में एक हो सकती है। हालांकि, नासा ने बाद में इसका आशंका को खारिज कर दिया। हालांकि, अभी भी इस बात की 3.8 फीसदी आशंका है कि 2024 वाईआर-4 चंद्रमा से टकरा सकता है। हालांकि, नासा ने बताया है कि ऐसा होने पर भी इससे चंद्रमा की कक्षा पर कोई असर नहीं होगा। 

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पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड - फोटो : Freepik
डिडिमोस और डिमॉर्फोस

डिडिमोस का मतलब ग्रीक भाषा में जुड़वां होता है। डिमॉर्फोस इसका एक छोटा चंद्रमा है और इसका चक्कर लगाता है। इन दोनों को पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं माना जाता, लेकिन ये अपेक्षाकृत नजदीक से गुजरते हैं। साल 2022 में नासा ने इनकी जांच के लिए डबल एस्टेरॉयड रिडायरेक्शन टेस्ट (डार्ट) मिशन शुरू किया। इस मिशन के तहत एक प्रोब यान डिमॉर्फोस एस्टेरॉयड से टकराया और स्वयं नष्ट हो गया। इसका मकसद यह जांच करना था कि अगर भविष्य में कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए खतरा बनता है, तो क्या उसका रास्ता बदला जा सकता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का हेरा मिशन अगले साल इस टक्कर के प्रभावों की जांच के लिए वहां जाएगा। 

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पृथ्वी से टकरा सकते हैं ये चार एस्टेरॉयड - फोटो : Freepik
साइकी एस्टेरॉयड

साइकी एस्टेरॉयड को नासा मेन एस्टेरॉयड बेल्ट की सबसे रोचक चीजों में से एक मानता है। वर्ष 1852 में यह खोजा गया था। यूनानी पौराणिक कथाओं में आत्मा की देवी साइक के नाम पर इसका नाम रखा गया है। यह पृथ्वी से काफी दूर है, लेकिन मंगल और बृहस्पति के बीच सूर्य की परिक्रमा करता है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि मुख्य तौर पर धातु और चट्टानों से इस एस्टेरॉयड का निर्माण हुआ है। माना जाता है कि साइकी में मौजूद ज्यादा धातु संभवतः ग्रहों के बनने की शुरुआती अवस्था में बने खगोलीय पिंड के कोर से आई है। इसके अध्ययन यह बात समझी जा सकती है कि पृथ्वी और अन्य ग्रहों का कोर कैसे बना। नासा ने वर्ष 2023 में इसकी निगरानी और अध्ययन के लिए एक विशेष मिशन शुरू किया था। 
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