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Ellora Kailasanatha Temple: किसी अजूबे से कम नहीं है भारत का ये मंदिर, 100 साल में बनकर हुआ था तैयार

Fri, 20 Jun 2025 07:13 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Ellora Kailasanatha Temple: यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित एलोरा की गुफाओं में है। इस मंदिर को एलोरा के कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है।  276 फीट लंबे और 154 फीट चौड़े इस मंदिर की खासियत यह है कि इसे सिर्फ एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है।
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किसी अजूबे से कम नहीं है भारत का ये मंदिर - फोटो : Adobe Stock
Ellora Kailasanatha Temple: हिंदू धर्म में भगवान और मंदिरों का बेहद महत्व है। माना जाता है कि भगवान ही इस सृष्टि का संचालन करते हैं। उनकी ही इच्छा से धरती पर सबकुछ होता है। वैसे तो हिंदू धर्म की मान्यता है कि भगवान हर जगह मौजूद हैं, लेकिन भारत की संस्कृति ही ऐसी है कि यहां जगह-जगह आपको अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिर मिल जाएंगे। ऐसा सदियों से चला आ रहा है कि लोग अपनी श्रद्धा से मंदिरों का निर्माण करवाते हैं। हम अपनी खबर में आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताएंगे, जो किसी अजूबे से कम नहीं है। कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में 100 साल से भी ज्यादा का समय लगा था।

यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित एलोरा की गुफाओं में है। इस मंदिर को एलोरा के कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है।  276 फीट लंबे और 154 फीट चौड़े इस मंदिर की खासियत यह है कि इसे सिर्फ एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है। ऊंचाई की अगर बात करें तो यह मंदिर किसी दो या तीन मंजिला इमारत के बराबर है।  
 
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किसी अजूबे से कम नहीं है भारत का ये मंदिर - फोटो : Adobe Stock
बताया जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में करीब 40 हजार टन वजनी पत्थरों को काटा गया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका रूप हिमालय के कैलाश की तरह देने का प्रयास किया गया है। 
 
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किसी अजूबे से कम नहीं है भारत का ये मंदिर - फोटो : Adobe Stock
कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कराने वाले राजा का मानना था कि अगर कोई इंसान हिमालय तक नहीं पहुंच पाए तो वो यहां आकर अपने अराध्य भगवान शिव का दर्शन कर ले। 

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किसी अजूबे से कम नहीं है भारत का ये मंदिर - फोटो : Adobe Stock
इस मंदिर का निर्माण कार्य मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (757-783 ई.) ने शुरु करवाया था। माना जाता है कि इसे बनाने में 100 साल से भी ज्यादा का समय लगा था और करीब 7000 मजदूरों ने दिन-रात एक करके इस मंदिर के निर्माण में अपना योगदान दिया था। 

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किसी अजूबे से कम नहीं है भारत का ये मंदिर - फोटो : Adobe Stock
इस भव्य मंदिर को देखने के लिए सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग आते हैं। इस मंदिर में आज तक कभी पूजा हुई हो, इसका प्रमाण नहीं मिलता। यहां आज भी कोई पुजारी नहीं है। यूनेस्को ने 1983 में ही इस जगह को 'विश्व विरासत स्थल' घोषित किया है। 
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