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El Nino: अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट

Fri, 12 Jun 2026 03:25 PM IST
Dharmendra Kumar Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

El Nino: अल नीनो की शुरुआत हो चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा कर दी है। अल नीनो का दुनियाभर के मौसम पर प्रभाव पड़ेगा। 
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अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट - फोटो : AI
El Nino: अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने आधिकारिक रूप से एलान कर दिया है कि अल नीनो की शुरुआत हो चुकी है। अल नीनो विकसित हो चुका है और संभावना है कि आने वाले महीनों में और ज्यादा मजबूत होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह जलवायु घटना 2026-27 की उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है। 

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाने अल नीनो बनता है। यह मौसमी घटना हर दो से सात में होती है। इसका पूरी दुनिया के मौसम पर प्रभाव पड़ता है। NOAA के जलवायु विशेषज्ञों ने बताया है कि अल नीनो के इसकी तीव्रता पर निर्भर करेंगे। इसके कारण कुछ इलाकों में ज्यादा बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, तो वहीं कुछ हिस्सों में सूखा और तेज गर्मी ला सकता है। जलवायु परिवर्तन इन प्रभावों को और बढ़ा या बदल सकता है। 

पूर्वानुमानों में अल नीनो के मजबूत होने की अधिक संभावना जताई गई है। वैज्ञानिकों ने संकेत दिया था कि इसके सर्दियों तक मजबूत स्तर तक पहुंचने की ज्यादा संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो से वैश्विक औसत तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ ही रिकॉर्ड गर्म वर्षों की संभावना बढ़ती है। इसका कृषि, जल संसाधनों, समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और मौसम संबंधी आपदाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। 



 
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अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट - फोटो : ANI
कैसे होती है अल नीनो की शुरुआत?

भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं के चलने से अल नीनो की शुरुआत होती है। यह हवाएं समुद्र की सतह के गर्म पानी को पूर्व की तरफ ले जाती हैं। इससे पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत इलाके में गर्म पानी का एक बड़ा भंडार बन जाता है। इस गर्म पानी से उसके ऊपर की हवा भी गर्म होती है। 
 
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अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट - फोटो : ANI
इसका परिणाम यह होता है कि वैश्विक वायुमंडल में मौसम प्रणालियां फिर से बनने लगती हैं और दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह 1950 से रिकॉर्ड रखे जाने के बाद की सबसे शक्तिशाली या सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं में से एक सकता है। 

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अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट - फोटो : Adobe Stock
क्या होगा दुनिया के मौसम पर प्रभाव? 

अल नीनो से अमेरिका के खाड़ी तट पर ज्यादा और गंभीर मौसम की घटनाएं बढ़ने की संभावना है। फ्लोरिडा में ज्यादा बारिश हो सकती है और बवंडर आ सकते हैं। अमेरिका के मध्य और उत्तरी हिस्सों में सर्दी गर्म हो सकती है शुष्क परिस्थितियां बन सकती हैं।

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अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट - फोटो : Freepik.com
दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, इंडोचाइना प्रायद्वीप और ओशिनिया में सूखा पड़ सकता है, तो वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया में औसत से ज्यादा बारिश और बाढ़ की घटनाएं हो सकती हैं। अल नीनो का भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून पर गहरा प्रभाव होता है। इसकी वजह से भारत के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसके लंबे सूखे दौर और असमान बारिश की स्थिति बन सकती है। 
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