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Egypt Giza Pyramid: गीजा के पिरामिडों को लेकर वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला दावा, पूरी दुनिया में मचा तहलका

Sun, 23 Mar 2025 02:44 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Egypt Giza Pyramid: दावा किया जा रहा है कि पिरामिडों के नीचे एक बेहद अमह खोज की गई है। इस दावे में दुनियाभर में हंगामा मचा दिया है। इटली और स्कॉटलैंड के शोधकर्ताओं ने दावा है ति गीजा के पिरामिडों के नीचे 'एक विशाल भूमिगत शहर' है।
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गीजा के पिरामिडों को लेकर वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला दावा - फोटो : Adobe Stock
Egypt Giza Pyramid: दुनिया में कई ऐसी जगहें, जिनके भीतर रहस्य छिपे हुए हैं। उन्ही जगहों में मिस्र भी शामिल है और वहां के पिरामिड। मिस्र की सबसे रहस्यमयी कलाकृति है 'द ग्रेट पिरामिड ऑफ गीजा'। यह दुनिया के सात अजूबों में से एक है। यहां के पिरामिडों का इतिहास 4000 साल पुराना बताया जाता है, लेकिन आज भी इन पिरामिडों से  कई रहस्य जुड़े है। इनके बारे में किसी के पास भी सही जानकारी नहीं। बताया जाता है कि गीजा का महान पिरामिड 2560 ईसा पूर्व में बनवाया गया था।

अब इन दावा किया जा रहा है कि पिरामिडों के नीचे एक बेहद अमह खोज की गई है। इस दावे में दुनियाभर में हंगामा मचा दिया है। इटली और स्कॉटलैंड के शोधकर्ताओं ने दावा है ति गीजा के पिरामिडों के नीचे 'एक विशाल भूमिगत शहर' है। नए शोध में दावा किया गया है कि गीजा के पिरामिडों के ठीक नीचे 6,500 फीट से अधिक गहराई तक शहर फैला है, जिससे पिरामिड खुद की ऊंचाई से 10 गुना बड़े हो सकते हैं। 
 
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गीजा के पिरामिडों पर खुलासे से पूरी दुनिया में मचा तहलका - फोटो : Adobe Stock
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इटली के पीसा विश्वविद्यालय के कोराडो मालंगा और स्कॉटलैंड के स्ट्रैथक्लाइड विश्वविद्यालय के फिलिपो बियोन्डी ने यह नया शोध किया है। उन्होंने अपने नए अध्ययन में यह हैरान करने वाला दावा किया है। इटली में इस सप्ताह हुई एक ब्रीफिंग के दौरान यह जारी किया गया है। हालांकि, अभी तक किसी वैज्ञानिक पत्रिका में यह प्रकाशित नहीं हुआ है। साथ ही अभी स्वतंत्र विशेषज्ञों ने इसका विश्लेषण नहीं किया है, जो आवश्यक होगा।  
 
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पिरामिडों के नीचे खोजी गईं ऐसी संरचनाएं - फोटो : Adobe Stock
पिरामिडों के नीचे खोजी गईं ऐसी संरचनाएं

इस नए अध्ययन के के मुताबिक, पिरामिड के नीचे आठ वर्टिकल बेलनाकार संरचनाएं 2,100 फीट से ज्यादा गहराई तक फैली है तथा 4,000 फीट गहराई पर अज्ञात संरचनाएं मिलने का भी दावा किया गया है। कई विशेषज्ञों ने पहले ही इस चौंकाने वाले दावे को खारिद कर दिया है।

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कैसे वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन - फोटो : Adobe Stock
यह एक ऐसे अध्ययन से खोज हुई है जिसमें संरचनाओं के नीचे जमीन में गहराई तक उच्च-रिजोल्यूशन वाली छवियां बनाने के लिए रडार पल्स का इस्तेमाल किया गया है। इसमें किसी तरह की खुदाई की आवश्यकता नहीं होती है। ठीक ऐसे ही जैसे सोनार रडार का इस्तेमाल समुद्र की गहराई का मैप बनाने के लिए किया जाता है। 

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गीजा में हैं तीन पिरामिड  - फोटो : Adobe Stock
गीजा में हैं तीन पिरामिड 

गीजा परिसर में तीन पिरामिड हैं, जिनके नाम खफरे, खुफु औक मेनकौर हैं। इनका निर्माण आज से करीब 4,500 साल पहले नील नदी के पश्चिमी तट पर किया गया था। हर पिरामिड को एक फराओ के नाम पर बनाया गया था। सबसे उत्तरी और सबसे पुराना खुफू के लिए बनाया गया था। जिसे ग्रेट पिरामिड के तौर पर जाता है और सबसे बड़ा है। खफरे के लिए मध्य पिरामिड को बनाया गया था, जिसका टीम ने अध्ययन किया था। मेनकौरे सबसे दक्षिणी तथा आखिरी पिरामिड है।

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क्या कहते हैं दूसरे विशेषज्ञ?  - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं दूसरे विशेषज्ञ? 

डेनवर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर लॉरेंस कोनयेर्स ने, जो पुरातत्व पर काम करने वाले रडार विशेषज्ञ है ने एक साक्षात्कार में बताया कि किसी टेक्नोलॉजी के लिए जमीन में इतनी गहराई तक जाना संभव नहीं है। इससे भूमिगत शहर का विचार एक बहुत बड़ी अतिशयोक्ति हो जाती है।

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''हो सकती हैं छोटी संरचनाएं'' - फोटो : Adobe Stock
प्रोफेसर कोनयेर्स का कहना है कि पिरामिडों के नीचे शाफ्ट और कक्ष जैसी छोटी संरचनाएं होने की संभावना है, जो उनके निर्माण से पहले से मौजूद थीं। उनका कहना है कि क्योंकि यह स्थल 'प्राचीन लोगों के लिए विशेष था। उन्होंने शंकाओं के बाद भी कहा कि इन खोजों को सत्य साबित करने का सिर्फ तरीका 'लक्षित उत्खनन' होगा। उनका कहना है कि शोधकर्ता मनगढ़ंत बातें नहीं बना रहे हैं और उनकी मूल पद्धति सही है। उस स्थल के बारे में चिंता करने वाले लोगों उनकी व्याख्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। व्याख्याओं के बारे में बहस की जा सकती है और इसे विज्ञान कहते हैं। हालांकि, बुनियादी तरीकों का ठोस होना आवश्यक है। 
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