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हालांकि, इस सूत्र पर सवाल उस समय खड़ा हुआ था कि द्रव्यमान से कितनी ऊर्जा रूपांतरित होगी और यह होगी भी या नहीं। ऐसे में आइंस्टीन खुद ही अपने थ्योरी को सिद्ध नहीं कर सके थे। लेकिन समय के साथ-साथ इस थ्योरी पर शोध और प्रयोग होते गए और 21वीं सदी में वैज्ञानिकों ने इस सूत्र के सिद्ध होने का दावा किया।
आइंस्टीन के थ्योरी देने के करीब 113 साल बाद फ्रेंच, जर्मन और हंगरी के वैज्ञानिकों ने साल 2018 में पुष्टि की थी कि प्रयोगों में यह सूत्र प्रामाणिक सिद्ध हुआ। लेकिन सिद्ध होने से पहले ही इस सूत्र का उपयोग कई आविष्कारों में हो चुका था।