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Ajab-Gajab: दुनिया का सबसे शक्तिशाली जीव, खौलते पानी में भी रह सकता है जिंदा, जानिए हैरान करने वाली बातें

Sun, 09 Nov 2025 04:58 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Ajab-Gajab: आमतौर पर इंसान 35 से 40 डिग्री के तापमान में ही परेशान हो जाता है, वहीं ये जीव 300 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान को सहन कर सकता है। इतना ही नहीं ये जीव अंतरिक्ष के ठंड और मरियाना ट्रेच जैसे भारी दबाव वाले क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है।
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दुनिया का सबसे शक्तिशाली जीव, खौलते पानी में भी रह सकता है जिंदा - फोटो : Adobe Stock
Ajab-Gajab: धरती पर कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। हम आपके एक ऐसे ही जीव के बारे में बताएंगे। यह जीव 'वॉटर बीयर' यानी टार्डिग्रेड्स है। इसे आप खौलते पानी में डाल दीजिए, भारी वजन के नीचे कुचल डालिए या फिर अंतरिक्ष में फेंक दीजिए, ये जिंदा रह जाएंगे। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2007 में हजारों टार्डिग्रेड्स को सैटेलाइट में डालकर अंतरिक्ष में भेजा था। जब  स्पेसक्राफ्ट धरती पर वापस आया तो देखा गया कि टार्डिग्रेड्स जिंदा थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मादा टार्डिग्रेड ने अंडे भी दे रखे थे।

आमतौर पर इंसान 35 से 40 डिग्री के तापमान में ही परेशान हो जाता है, वहीं ये जीव 300 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान को सहन कर सकता है। इतना ही नहीं ये जीव अंतरिक्ष के ठंड और मरियाना ट्रेच जैसे भारी दबाव वाले क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है। माना जाता है कि टार्डिग्रेड धरती के सबसे मजबूत जीव हैं, जो ज्वालामुखी से लेकर बर्फ में भी जीवित रह जाते हैं। 
टार्डिग्रेड्स आम तौर पर उन जगहों पर पाए जाते हैं, जो पानी की मौजूदगी के बाद सूख चुकी होती हैं। समय के साथ इस जीव ने शुष्क माहौल में भी अपनी जान बचाए रखने और कई वर्षों बाद दोबारा पानी पाकर जिंदा हो उठने की क्षमता विकसित कर ली है।

सूखे की समस्या होने पर टार्डिग्रेड के कुछ ऐसे जीन सक्रिय हो जाते हैं, जो उनकी कोशिकाओं में पानी की जगह ले लेते हैं। फिर वे इसी तरह रहते हैं और कुछ महीनों या वर्षों बाद, जब दोबारा पानी उपलब्ध होता है, तो अपनी कोशिकाओं को वो दोबारा पानी से भर लेते हैं।

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस जीव के भीतर 'पैरामैक्रोबियोटस' नामक जीन पाया जाता है। पैरामैक्रोबियोटस एक सुरक्षात्मक फ्लोरोसेंट ढाल है, जो अल्ट्रा वॉयलेट रेडिएशन का विरोध करता है। यह जीन हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर उसे हानिरहित नीली रोशनी के रूप में वापस बाहर निकालता है। वहीं सामान्य जीव इन हानिकारक किरणों के बीच महज 15 मिनट तक ही जिंदा रह सकते हैं।

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस जीव के 'पैरामैक्रोबियोटस' को निकालकर अन्य जीवों में भी ट्रांसफर किया जा सकता है। ऐसा करने से अन्य जीव भी खतरनाक हालातों और रेडिएशन के बीच जीवित रह सकते हैं।
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