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Zara Hatke: इस देश में हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज, जानिए कितना पुराना है इतिहास

Sun, 23 Mar 2025 04:50 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Zara Hatke: ताइवान के मसाज पार्लरों में छुरे से बड़े पैमाने पर लोगों का मसाज किया जाता है। इसे 'डाउलियाओ' कहा जाता है। इसका चीनी शब्द में मतलब होता है, 'छुरे से मसाज' या 'नाइफ थेरेपी'। चीनी औषधि विज्ञान में इसका काफी चलन है।
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इस देश में हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
Ajab-Gajab: हम सभी छुरे का इस्तेमाल फल, सब्जी और अन्य वस्तुओं को काटने के लिए करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि छुरे से मसाज भी होता है। यह आपको सुनने में थोड़ा अजीबोगरीब जरूर लग रहा होगा, लेकिन यह बिल्कुल सच है। दरअसल, ताइवान के मसाज पार्लरों में छुरे से बड़े पैमाने पर लोगों का मसाज किया जाता है। इसे 'डाउलियाओ' कहा जाता है। इसका चीनी शब्द में मतलब होता है, 'छुरे से मसाज' या 'नाइफ थेरेपी'। चीनी औषधि विज्ञान में इसका काफी चलन है। वहां छुरे से मसाज का इतिहास करीब 2000 साल पुराना है। बताया जाता है कि बौद्ध भिक्षुओं ने इसकी शुरुआत की थी। 

लगभग एक हजार साल पहले तांग वंश के शासन में यह थेरेपी जापान में भी खूब फली फूली। 1940 के दशक में चीन के गृह युद्ध के दौरान छुरे से मसाज की यह परंपरा ताइवान पहुंच गई। हालांकि, चीन और जापान में इस थेरेपी का चलन करीब खत्म हो गया है, लेकिन ताइवान में यह अभी भी खूब लोकप्रिय है।
 
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इस देश में हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
इस मसाज के फायदे

नाइफ मसाज का इस्तेमाल जख्म ठीक करने, नींद बेहतर करने और शरीर के पुराने दर्द को ठीक करने में भी किया जा रहा है। चीनी औषधि विज्ञान में जिस तरह एक्यूप्रेशर थेरेपी की जाती है, ठीक उसी तरह नाइफ थेरेपी में प्रेशर प्वाइंट को टारगेट किया जाता है। इन्हें क्यूआई-डोर्स कहा जाता है। 

 
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इस देश में हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
राजधानी ताइपे में छूरे से मसाज करने वाले कई पार्लर हैं। इसमें थेरैपिस्ट दो चाकुओं को केमिकल से साफ करते हैं और फिर पूरे शरीर पर इससे मसाज करते हैं। मसाज के दौरान शरीर के प्रेशर प्वाइंट्स पर दबाव डालते हैं। यह चीन में इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक्वापंक्चर पद्धति जैसा है। 

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इस देश में हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
नाइफ थेरेपी में कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरुरी होता है। मिसाल के लिए अगर मसाज करने वाला अच्छे मूड में नहीं है, तो उसे नाइफ नहीं दी जानी चाहिए। माना जाता है कि ऐसे मसाज करने वाले की बुरी ऊर्जा मसाज लेने वाले पर बुरा प्रभाव डालेगी। 

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इस देश में हाथों से नहीं छुरे से होता है मसाज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
छुरे से मसाज करने वालों को हमेशा सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम करना चाहिए। इसके लिए उन सभी को शुद्ध शाकाहारी भोजन का सेवन करना पड़ता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बौद्ध भिक्षुओं ने इसका प्रचार किया था। करीब एक हजार साल पहले तांग वंश ने इसे जापान में फैलाया। जापान और चीन में यह चलन करीब खत्म हो चुका है, लेकिन ताइवान में यह अभी भी चल रहा है। 
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