प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में मोहम्मद नुरुद्दीन ने बताया कि साल 1987 से वो लगातार 10वीं की परीक्षा दे रहे हैं। लेकिन अंग्रेजी में कमजोर होने के कारण वो हर साल फेल हो जा रहे थे। हालांकि, 33 सालों से लगातार फेल होने के बावजूद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इस बार कोरोना के वजह से किस्मत ने उन्हें साथ दिया और सरकार के फैसले के वजह से मोहम्मद नुरुद्दीन पास हो गए।