आज भी आचार्य चाणक्य की नीतियां केवल राजनीति या प्रशासन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पारिवारिक जीवन, शिक्षा और बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में भी उनका विशेष महत्व माना जाता है। चाणक्य नीति में ऐसे कई सिद्धांत बताए गए हैं, जो आज के दौर में भी लोगों को सही दिशा दिखाते हैं। खासकर बच्चों के पालन-पोषण और उनके संस्कारों को लेकर चाणक्य ने कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं।
चाणक्य नीति के अनुसार किसी भी बच्चे की सबसे बड़ी पहचान उसका चरित्र और उसके गुण होते हैं। यही गुण उसे समाज में सम्मान दिलाते हैं और माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा करते हैं। आचार्य चाणक्य का मानना है कि यदि बचपन से ही बच्चों में अच्छे संस्कार और सकारात्मक आदतें विकसित की जाएं, तो वे आगे चलकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। आइए जानते हैं कि चाणक्य नीति के अनुसार बच्चों में कौन-कौन से गुण होने चाहिए।