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Blood Falls: ग्लेशियर से बह रहा है खून का झरना, अंटार्कटिका में ऐसा नजारा देख हैरत में पड़े वैज्ञानिक

Sun, 09 Oct 2022 01:44 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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ग्लेशियर से बह रहा है खून का झरना - फोटो : Twitter @pixikiIler
Blood Falls:  दुनिया में कई रहस्य हैं जिनके बारे में जानने की वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं। अब इस बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसके बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। अंटार्कटिका (Antarctica) में एक टेलर ग्लेशियर (Taylor Glacier) है जिससे खून का झरना बह रहा है। पूर्वी अंटार्कटिका के विक्टोरिया लैंड (Victoria Land) पर टेलर ग्लेशियर स्थित है। खोजकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने इस ग्लेशियर से खून का झरना बहता देख हैरान हो गए। 

बताया जा रहा है कि टेलर ग्लेशियर से यह खून का झरना दशकों से इसी तरह बह रहा है। वैज्ञानिक इस ग्लेशियर से खून का झरना बहने की वजह का पता अब जाकर लगा पाए हैं। उनका कहना है कि टेलर ग्लेशियर के नीचे एक बेहद प्राचीन जगह है। माना जाता है कि इस जगह पर जीवन है यानी ग्लेशियर के नीचे जीवन पनपा रहा है। कुछ वैज्ञानिकों ने नजदीक से खून के झरने को देखा है। उन्होंने सैंपल की जांच की और बताया उसका स्वाद नमकीन है जिस तरह खून का होता है। यह जगह खतरों से भरा हुआ है और यहां जाना जान जोखिम में डालने की तरह है। 
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ग्लेशियर से बह रहा है खून का झरना - फोटो : Twitter@pixikiIler
ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस ग्रिफिथ टेलर (Thomas Griffith Taylor) ने सबसे पहले खून के झरने की खोज साल 1911 में की थी। यूरोपियन वैज्ञानिक अंटार्कटिका के इस क्षेत्र में सबसे पहले पहुंचे थे। ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस और उनके साथियों ने इस लाल रंग को एल्गी Red Algae)समझा था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसके बाद इस मान्यता को रद्द कर दिया गया। 
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ग्लेशियर से बह रहा है खून का झरना - फोटो : Twitter @summerstoli
वैज्ञानिकों को साल 1960 में पता चला कि गेल्श्यिर के नीचे लौह नमक (Iron Salts) मौजूद है। लौह नमक का मतलब  फेरिक हाइड्रोक्साइड (Ferric Hydroxide)। बर्फ की मोटी परत से निकल रहा है जैसे आप पाउच से शैंपू निकालते हैं। इसके बाद साल 2009 में एक स्टडी से हैरान करने वाला खुलासा हुआ। इस ग्लेशियर के नीचे सूक्ष्मजीव होने की जानकारी मिली। इसके कारण ग्लेशियर से खून का झरना निकल रहा है। 

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Blood Falls - फोटो : Twitter @ShannyGasm

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ग्लेशियर के नीचे 15 से 40 लाख साल से सूक्ष्मजीव रह रहे हैं। बहुत बड़े इकोसिस्टम का यह छोटा सा भाग है जिसे वैज्ञानिक खोज पाए हैं। वैज्ञानिकों को एक इलाके से दूसरे इलाके तक की खोज करने में दशकों लग जाएंगे। इस क्षेत्र में आना जाना और रहना बेहद कठिन है। 

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ग्लेशियर से बह रहा है खून का झरना - फोटो : Twitter @ThomasHNylen
प्रयोगशाला में खून के झरने के पानी की जांच की गई, तो इसमें दुर्लभ सबग्लेशियल इकोसिस्टम के बैक्टीरिया पाए गए। इनके बारे में किसी को भी कोई जानकारी नहीं है। जहां पर ऑक्सीजन नहीं है वहां पर यह जिंदा है।  बिना फोटोसिंथेसिस इस जगह पर बैक्टीरिया जीवित हैं और नए बैक्टीरिया पैदा हो रहे हैं। इस जगह पर तापमान दिन में माइनस सात डिग्री सेल्सियस रहता है और खून का झरना बेहद ठंडा है। यह नमक की वजह से जमता नहीं है और बहता रहता है। नमक नहीं होता, तो जम जाता। 

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ग्लेशियर से बह रहा है खून का झरना - फोटो : Twitter @DubiousByName

वैज्ञानिकों के लिए अभी यह रहस्य है कि आखिर खून के झरने पर अंदर से कौन दबाव डला रहा है। इस प्रेशर की वजह से ग्लेशियर से खून का खरना बाहर निकल रहा है। ग्लेशियर के नीचे खून के झरने का स्त्रोत लाखों साल से दबा है। 
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