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Bermuda Triangle: बरमूडा ट्रायंगल के नीचे मिली ये रहस्यमयी चीज, जानें क्या सुलझ गई हादसों की गुत्थी

Mon, 18 May 2026 01:16 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Bermuda Triangle: हाल ही में हुई एक रिसर्च ने बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य को आसमान से हटाकर समुद्र की गहराई में ला खड़ा किया है। वैज्ञानिकों ने बरमूडा द्वीप के करीब 20 किलोमीटर नीचे एक बेहद अनोखी और हल्की चट्टानी परत का पता लगाया है।
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सामने आया बरमूडा ट्रायंगल का अनोखा रहस्य - फोटो : AI
Bermuda Triangle Mystery:  बरमूडा ट्रायंगल समुद्र के बीचों-बीच एक ऐसा इलाका है, जिसका नाम सुनते ही रहस्य, डर और अनसुलझी कहानियां दिमाग में घूमने लगती हैं। दशकों से यह जगह कभी गायब हुए जहाजों, कभी लापता विमानों और कभी अचानक फेल हुए कंपास की वजह से सुर्खियों में रही है। कई बार इसे एलियन या किसी रहस्यमयी ताकत से भी जोड़ दिया गया, लेकिन अब विज्ञान ने इस कहानी में एक नया मोड़ ला दिया है।

हाल ही में हुई एक रिसर्च ने इस रहस्य को आसमान से हटाकर समुद्र की गहराई में ला खड़ा किया है। 'जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने बरमूडा द्वीप के करीब 20 किलोमीटर नीचे एक बेहद अनोखी और हल्की चट्टानी परत का पता लगाया है। खास बात यह है कि ऐसी संरचना अब तक किसी अन्य समुद्री द्वीप के नीचे देखने को नहीं मिली।

दरअसल, बरमूडा ट्रायंगल अटलांटिक महासागर का वह क्षेत्र है, जिसे मियामी, सान जुआन और बरमूडा को जोड़कर बने एक काल्पनिक त्रिकोण के रूप में समझाया जाता है, और यही इसकी पहचान बन गई।
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समुद्र के नीचे क्या है खास? - फोटो : Adobe Stock
समुद्र के नीचे क्या है खास?
कार्नेगी साइंस और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों की मदद से धरती के भीतर की 3D तस्वीर तैयार की। इसमें सामने आया कि बरमूडा के नीचे समुद्री सतह और मेंटल के बीच कम घनत्व वाली मोटी चट्टानी परत मौजूद है। यह परत किसी तैरते हुए प्लेटफॉर्म की तरह काम करती है, जो इस द्वीप को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, करोड़ों साल पहले यहां ज्वालामुखीय गतिविधियां थमने के बाद लावा जमा होकर ठंडा हो गया और इसी प्रक्रिया ने इस हल्की चट्टानी नींव को जन्म दिया। यही वजह है कि बरमूडा आज भी समुद्र के ऊपर टिका हुआ है, जबकि आमतौर पर ज्वालामुखीय द्वीप समय के साथ धीरे-धीरे धंस जाते हैं।
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क्या सुलझ गया गायब होने का रहस्य? - फोटो : Adobe Stock
क्या सुलझ गया गायब होने का रहस्य?
इस खोज के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या अब जहाजों और विमानों के गायब होने का रहस्य भी सुलझ गया? वैज्ञानिकों का जवाब साफ है, नहीं। इस नई खोज का उन घटनाओं से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। यूनाइटेड स्टेट्स कोस्ट गार्ड समेत कई एजेंसियां पहले भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि इस इलाके में हादसों की संख्या असामान्य नहीं है। दरअसल, तेज तूफान, ऊंची लहरें, अचानक बदलता मौसम और इंसानी भूलें, ये सभी कारक मिलकर हादसों की वजह बनते हैं।

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फिर क्यों अहम है यह खोज? - फोटो : Adobe Stock
फिर क्यों अहम है यह खोज?
भले ही यह खोज रहस्यमयी कहानियों को खत्म नहीं करती, लेकिन पृथ्वी के इतिहास को समझने में यह बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संरचना उस समय से जुड़ी हो सकती है, जब सुपरकॉन्टिनेंट पैंजिया टूट रहा था।

अब शोधकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या ऐसी संरचनाएं दुनिया के अन्य समुद्री द्वीपों के नीचे भी मौजूद हैं। अगर ऐसा हुआ, तो महासागरीय द्वीपों के बनने की मौजूदा समझ में बड़ा बदलाव आ सकता है।
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क्या सच में निगल जाता है बरमूडा ट्रायंगल? - फोटो : Adobe Stock
क्या सच में निगल जाता है बरमूडा ट्रायंगल?
NOAA, US Coast Guard और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बरमूडा ट्रायंगल में जहाजों या विमानों के गायब होने की घटनाएं किसी भी अन्य व्यस्त समुद्री क्षेत्र से ज्यादा नहीं हैं।

असलियत यह है कि यहां होने वाले अधिकांश हादसे प्राकृतिक कारणों और मानवीय गलतियों का नतीजा होते हैं। हालांकि, फिल्मों, कहानियों और मीडिया ने इसे इतना रहस्यमयी बना दिया कि यह जगह एक मिथक बनकर उभरी।

हकीकत में, बरमूडा ट्रायंगल कोई जादुई या अलौकिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक सामान्य समुद्री इलाका है, बस फर्क इतना है कि इसकी कहानियां दुनिया भर में सबसे ज्यादा सुनी और सुनाई जाती हैं।

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