प्रेशराइज्ड इंक कार्ट्रिज तकनीक की मदद से बना पेन
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लंबे शोध और प्रयोगों के बाद उन्होंने एक खास तकनीक विकसित की 'प्रेशराइज्ड इंक कार्ट्रिज'। इसमें नाइट्रोजन गैस का दबाव स्याही को हर दिशा में बहने में मदद करता है। यानी यह पेन उल्टा पकड़कर, पानी के भीतर, बर्फ पर या तेल जैसी सतह पर भी बिना रुके लिख सकता है।
सिर्फ इतना ही नहीं, यह -34°C से लेकर +121°C तक के तापमान में भी बेहतरीन तरीके से काम करता है। एक बार भरा गया कार्ट्रिज करीब 50 किलोमीटर तक लिख सकता है, जो इसे बेहद टिकाऊ और भरोसेमंद बनाता है। यही वजह है कि नासा ने अपोलो मिशन से लेकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक इसका इस्तेमाल किया। दिलचस्प बात यह है कि बाद में सोवियत स्पेस प्रोग्राम ने भी इसी पेन को अपनाया।