दिन एक, मगर नाम अनेक। साल भर की व्यस्तता के बीच आज के दिन का लुत्फ जरूर उठाएं और दोस्तों को अप्रैल फूल बनाएं।
‘अप्रैल फूल’ से एक सप्ताह पहले ही सभी जगह यह तैयारियां शुरू हो जाती हैं कि किसे किस तरह मूर्ख बनाया जाए। पूरे साल किसी न किसी उद्देश्य के पीछे भागने के दौरान यह दिन मन को आनंदित करता है। लोग थोड़ा हंस-बोल लेते हैं। दुनिया भर में इसे अलग नामों से जाना जाता है और कहीं किसी देश में इसे मनाने के पीछे सदियों से चली आ रही परंपराएं भी शामिल हैं। इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, नीदरलैंड आदि देशों में अप्रैल फूल बनाने के अलग तरीके हैं।
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स्कॉटलैंड में अप्रैल फूल दो दिनों तक चलता है और इसे 'अप्रैल गॉक', 'गॉकी डे' और 'हंट द गॉक' कहा जाता है।
महीने की दूसरी तारीख यानी 2 अप्रैल को 'टैली डे' कहा जाता है। इसमें वहां के लोग एक-दूसरे के पीछे 'किक मी' जैसे स्टीकर चिपका देते हैं और पूरे दिन वह व्यक्ति इस स्टीकर को लिए घूमता है। वहीं, इंग्लैंड में आप किसी व्यक्ति को सिर्फ 12 बजे से पहले ही मूर्ख बना सकते हैं। दोपहर 12 बजे के बाद यदि आप किसी को मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं, तो आप खुद मूर्ख समझे जाते हैं।
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मूर्ख बनने वाले को वहां 'नूडल' या ‘गॉक’ नाम दिया जाता है। अगर कोई दूसरे को बेवकूफ बनाने में कामयाब होता है, तो वह 'फूल, फूल, द गॉको' कहकर उसे संबोधित करता है। वहीं, अगर मूर्ख बनने वाला बच जाता है, तो वह मू्र्ख बनाने वाले को जवाब में कहता है, ‘मूर्ख बनाने वाला और टिटलिन चिड़िया पेड़ पर बैठे, मैं बच गया और तुम मूर्ख बने’। इंग्लैंड के लेक एरिया में अप्रैल फूल, ‘अप्रैल नोबडी’ के नाम से जाना जाता है और वहां दिन के अंत में लोग 'यह दिन भी बीत गया, तुम बने मूर्ख और मैं फिर से बच गया’ गाकर बीतती शाम का आनंद लेते हैं।
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आयरलैंड में लोग एक-दूसरे को 'महत्वपूर्ण पत्र' लिखकर भेंट करते हैं और यह पत्र इस तरह घूमता रहता है। अंत में पत्र पाने वाला व्यक्ति जब इसे खोलता है, तो वह कुछ न पाकर मूर्ख बन जाता है।
पत्र में लिखा होता है, 'आप बेवकूफ बन गए, अब किसी दूसरे को बेवकूफ बनाए।' इसी तरह बेल्जियम, नीदरलैंड आदि देशों में इसे 'अप्रैल फिश' के नाम से जाना जाता है। लोग फिश का स्टीकर एक-दूसरे के पीछे चिपका देते हैं और फिर ‘हैलो फिश’ कहकर संबोधित करते हैं।